नई दिल्ली, जन धन बैंक खाते, आधार और मोबाइल फोन (JAM Trinity) जैसे डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Payment Infrastructure) के बिना, भारत को 80% की वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) दर हासिल करने में 47 साल लगते, जिसे देश ने केवल 6 वर्षों में ही हासिल कर लिया है. यह बात विश्व बैंक द्वारा तैयार किए गए एक G20 पॉलिसी डॉक्यूमेंट में की गई है. News18 के पास इस दस्तावेज की प्रति मौजूद है. विश्व बैंक के इस दस्तावेज में यह भी दर्ज किया गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष में यूपीआई ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू भारत की नॉमिनल जीडीपी (नॉमिनल जीडीपी मौजूदा कीमतों का उपयोग करके आउटपुट को मापता है, जबकि रियल जीडीपी स्थिर कीमतों का उपयोग करके आउटपुट को मापता है) का लगभग 50% था.

न्यूज18 के पास मौजूद विश्व बैंक के दस्तावेज में कहा गया है, ‘भारत में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्च के उपयोग से ग्राहकों को जोड़ने की बैंकों की लागत 23 डॉलर से घटकर 0.1 डॉलर हो गई. मार्च 2022 तक, भारत ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए 33 बिलियन डॉलर की कुल बचत की, जो उसकी जीडीपी के लगभग 1.14% के बराबर है.’ G20 ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर फाइनेंशियल इंक्लूजन (GPFI) के लिए यह दस्तावेज विश्व बैंक द्वारा भारत के वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधित्व वाले G20 इंडिया प्रेसीडेंसी के मार्गदर्शन और इनपुट के साथ तैयार किया गया है.

भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का मुरीद हुआ विश्व बैंक

भारत नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में डिजिटल पेमेंट और फाइनेंशियल इंक्लूजन के मोर्चे पर अपनी सफलताओं को प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. वर्ल्ड बैंक के डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि इंडिया स्टैक डिजिटल आईडी, इंटरऑपरेबल पेमेंट, डिजिटल क्रेडेंशियल लेजर और अकाउंट एग्रीगेशन के साथ डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है. दस्तावेज में कहा गया है, ‘केवल 6 वर्षों में, इसने (इंडिया स्टैक ने) उल्लेखनीय 80% वित्तीय समावेशन दर हासिल की है- एक ऐसी उपलब्धि जिसे हासिल करने में डीजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना लगभग 5 दशक लग जाते.’

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जन धन बैंक खातों और मोबाइल फोन के साथ-साथ आधार जैसे डिजिटल इंफ्रा ने लेनदेन खातों के स्वामित्व को 2008 में लगभग एक-चौथाई वयस्कों से बढ़ाकर अब 80 प्रतिशत से अधिक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.’ अपनी लॉन्चिंग के बाद से, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) बैंक खातों की संख्या मार्च 2015 में 147.2 मिलियन से 3 गुना बढ़कर जून 2022 तक 462 मिलियन हो गई; इनमें से 56% यानी 260 मिलियन से अधिक बैंक खातों की मालिक महिलाएं हैं. इसमें कहा गया है कि इस सफलता में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका निस्संदेह बड़ी है, लेकिन सरकार की नीतियां भी महत्वपूर्ण थीं.

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में की मोदी सरकार के नीतियों की तारीफ
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा गया है, ‘इनमें अधिक सक्षम कानूनी और नियामक ढांचा बनाने के लिए हस्तक्षेप, बैंक अकांउट ओनरशिप का विस्तार करने के लिए राष्ट्रीय नीतियां और पहचान सत्यापन के लिए आधार का लाभ उठाना शामिल है.’ इसमें बताया गया है कि कैसे भारत में यूपीआई जैसी फास्ट पेमेंट सिस्टम (FPS) को अपनाना विशेष रूप से ‘त्वरित और परिवर्तनकारी’ रहा है. यूपीआई को व्यापक रूप से अपनाया गया है, यूजर फ्रेंडली इंटरफेस, ओपन बैंकिंग फैसिलिटी और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से लाभ हुआ है.

विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया, ‘UPI प्लेटफॉर्म ने भारत में महत्वपूर्ण लोकप्रियता हासिल की है; मई 2023 में ही लगभग 14.89 ट्रिलियन रुपये मूल्य के 9.41 बिलियन से अधिक लेनदेन किए गए. वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए, यूपीआई लेनदेन का कुल मूल्य भारत की नॉमिनल जीडीपी का लगभग 50% था.’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रा व्यवसाय संचालन की जटिलता, लागत और समय में कटौती के माध्यम से निजी संगठनों के लिए एफिशिएंसी बढ़ा सकते हैं. भारत में कुछ गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए, अकांउट एग्रीगेटर इकोसिस्टम ने एसएमई लोन डिस्ट्रीब्यूशन में 8% अधिक कन्वर्जन रेट दिया है. ​डेप्रिसिएशन कॉस्ट में 65% की बचत हुई, और फ्रॉड का पता लगाने से संबंधित लागत में 66% की कमी आई है.

डीबीटी से केंद्र सरकार ने $33 बिलियन की बचत की

इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के उपयोग से भारत में ग्राहकों को जोड़ने की बैंकों की लागत $23 से घटकर $0.1 हो गई है. इंडिया स्टैक ने केवाईसी प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बना दिया है, जिससे लागत कम हो गई है.’ विश्व बैंक की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ई-केवाईसी का उपयोग करने वाले बैंकों ने अपनी कंप्लायंस कॉस्ट $0.12 से घटाकर $0.06 कर दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे पिछले दशक में, भारत ने DPI का लाभ उठाते हुए दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल गवर्नमेंट-टू-पीपल आर्किटेक्चर में से एक का निर्माण किया. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से केंद्र सरकार के 53 मंत्रालयों के 312 प्रमुख योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचा है और लगभग 361 बिलियन डॉलर की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है. इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार को मार्च 2022 तक, $33 बिलियन (करीब 27,41,21,10,00,000 रुपए) की कुल बचत हुई, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.14% के बराबर है.’