मंदसौर, हम बात कर रहे है मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ विधानसभा की जहाँ लगातार कांग्रेस 15 साल यानी तीन चुनाव हार गई।
मल्हारगढ़ विधानसभा का परिसीमन में 2008 में उदय हुआ जहाँ चार बार के विधायक रहे जगदीश देवड़ा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया था तो कांग्रेस ने एक मामूली से आदमी जनपद सदस्य श्यामलाल जोकचंद को अपना उम्मीदवार बनाया था तब यहाँ के फ़ायनर्सल लोगों ने श्यामलाल जोकचंद को काफी सपोर्ट किया था और विधानसभा क्षेत्र में चर्चाएं चल पड़ी थी कि  राजस्थान सरकार के मंत्री उदयलाल आंजना ने एक बोलेरो साथ ही 25 लाख नगद दिए थे  साथ ही पार्टी फ्रंड भी अच्छी स्थिति में आया था ये सब बातें मार्केट से हमारे पास आई थी अब इसमें कितनी सच्चाई है ये तो श्यामलाल जोकचंद जाने या भगवान ।
नतीजा यह रहा कि श्यामलाल जोकचंद भाजपा उम्मीदवार जगदीश देवड़ा से 3600 वोटों से चुनाव हार गए थे कार्यकर्ताओं के द्वारा उस समय यहाँ तक कहा गया था की श्यामलाल जोकचंद पार्टी फ्रंड व फ़ायनर्सल लोगों के पैसे चुनाव में लगा देते तो चुनाव में हार का मुँह नहीं देखा पड़ता था बेचारे कार्यकर्ता गांव  भूखे प्यासे घूमते रहे जहाँ तक कि कार्यकर्ताओ को समय पर भोजन व चाय तक नहीं मिल थी

चुनाव जीतने के बाद विधायक जगदीश देवड़ा जेल एवं परिवहन मंत्री बने मध्यप्रदेश सरकार में फिर लागातार जगदीश देवड़ा क्षेत्र का विकास करते गए और आज 600 करोड़ की सिर्फ मल्हारगढ़ विधानसभा में सड़के बनाई।

वापस 2013 में मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार ने मिशन 2013 का नारा दिया और एक बार फिर जगदीश देवड़ा को भाजपा ने मल्हारगढ़ विधानसभा से परिवहन मंत्री जगदीश देवड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया तो वहीं  कांग्रेस में कम वोटों से हारे कांग्रेस नेता श्यामलाल जोकचंद को अपना उम्मीदवार बनाया। वहीं 2013 में कांग्रेस से टिकट मांग रहे युवा नेता परशुराम सिसोदिया भी मैदान में थे लेकिन उनको टिकट नहीं मिला।
2013 विधानसभा चुनाव में फिर भाजपा उम्मीदवार जगदीश देवड़ा से कांग्रेस उम्मीदवार श्यामलाल जोकचंद 6700 वोटों से चुनाव हार गए।
और युवा कांग्रेस नेता परशुराम सिसोदिया के ऊपर भीतर घात के आरोप लगाए थे हालांकि इसके सबूत नहीं थे वहीं से कांग्रेस नेताओं की आपसी लड़ाई शुरू हुई और कार्यकर्ताओं का नुकसान होता रहा है आज दिन तक।

2015 में कांग्रेस नेता परशुराम सिसोदिया त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अपनी पत्नी रामकन्या बाई को जिला पंचायत वार्ड 06 से चुनाव जितवाया और खुद मंदसौर जनपद के वार्ड 10 से जनपद सदस्य निर्वाचित हुए थे लगातार कांग्रेस नेता का ग्राफ़ मल्हारगढ़ विधानसभा में बढ़ता गया।

2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने विधायक जगदीश देवड़ा जो कि पहले जेल एवं परिवहन मंत्री थे लेकिन व्यापमं घोटाले में मंत्री जगदीश देवड़ा के ओ एस डी राजेंद्र का नाम आने से जगदीश देवड़ा को 2013 से 2018 तक मंत्री पद नहीं मिला था  लेकिन 2018 में भाजपा ने फिर अपना उम्मीदवार जगदीश देवड़ा को बनाया तो वहीं कांग्रेस ने दो बार हार चुके श्यामलाल जोकचंद का टिकट काट कर युवा नेता परशुराम सिसोदिया को अपना उम्मीदवार बनाया था ये बात श्यामलाल जोकचंद को नागवार गुजरी और खुद श्यामलाल जोकचंद ने एक लड़की को बोल रहे थे कि वोट जगदीश देवड़ा को दिलाना है इसका ऑडियो भी खूब वायरल हुई थी वहीं कांग्रेस उम्मीदवार परशुराम सिसोदिया 10 हजार वोटो से चुनाव हार गए
अब 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस में परशुराम सिसोदिया को अपना उम्मीदवार बनाया है लेकिन मैदान में निर्दलीय के रूप में श्यामलाल जोकचंद के लड़ने का ऐलान होने के बाद तस्वीर साफ नहीं हो रही।
इन तमाम घटना क्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्या मिला अगर ये मंथन दोनों नेता बैठकर करें तो सफलता जरूर मिल सकती है
लेकिन नसीब के धनी व्यक्ति वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा को ये दोंनो कांग्रेसी नेता तिलक निकाल कर मल्हारगढ़ विधानसभा को श्री देवड़ा की झोली में डालना चाहते है.