केरला में कांग्रेस कों मुख्य मंत्री चुनने मैं देरी क्यों
UDF में अंदरूनी मंथन जारी
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने केरल में सरकार बनाने के लिए अपने पारंपरिक गठबंधन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के सहयोगी दलों के साथ मिलकर बहुमत जुटाया है। इस गठबंधन में मुख्य रूप से ये दल शामिल माने जाते हैं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरला कांग्रेस की विभिन्न इकाइयाँ, रेवोलुशनरी सोशलिस्ट पार्टी,कुछ छोटे क्षेत्रीय और ईसाई समुदाय आधारित दल शामिल हैँ। केरल की राजनीति लंबे समय से दो बड़े गठबंधनों UDF और Left Democratic Front (LDF) के बीच घूमती रही है। ऐसे में कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। अभी तक मुख्यमंत्री चुनने में परेशानी क्यों इसका मुख्य कारण कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती “गुटबाजी” मानी जा रही है। केरल कांग्रेस में कई वरिष्ठ चेहरे हैं जो नेतृत्व की दौड़ में रहते हैं। इनमें अलग-अलग समुदायों, क्षेत्रों और गुटों का संतुलन भी देखना पड़ता है वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी प्रतिस्पर्धा हिंदू मुस्लिम और ईसाई समुदायों का राजनीतिक संतुलन सहयोगी दलों की पसंद-नापसंद युवा बनाम अनुभवी नेतृत्व की बहस हाईकमान और राज्य इकाई के बीच तालमेल ना होना कांग्रेस अक्सर ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो गठबंधन सहयोगियों को साथ रख सके विपक्ष के हमलों का जवाब दे सके अगले लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को फायदा पहुंचाए इसके साथ ही कांग्रेस के सामने संभावित चुनौतियाँ रहेगी सरकार बनने के बाद कांग्रेस को कई मोर्चों पर दबाव झेलना पड़ सकता है गठबंधन का दबाव UDF के सहयोगी दल मंत्रालय, महत्वपूर्ण विभाग और नीतिगत फैसलों में हिस्सेदारी चाहेंगे। इससे सरकार पर लगातार दबाव बना रह सकता है। कम्युनिस्ट Party ऑफ़ इंडिया (Marxist) और LDF का मजबूत विपक्ष केरल में वामपंथ बेहद संगठित है। छोटी गलती भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। बेरोजगारी और आर्थिक संकट राज्य मे पहले से ही सबसे बड़े विषय रहें हैँ इसके अलावा सरकार कर्ज, वेतन, पेंशन और विकास परियोजनाओं के वित्तीय दबाव से जूझती रही है। नई सरकार पर रोजगार और निवेश बढ़ाने का दबाव रहेगा। धार्मिक और सामुदायिक संतुलन केरल की राजनीति में चर्च, मुस्लिम संगठनों और हिंदू समुदाय का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है। किसी एक वर्ग की नाराजगी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। केंद्र-राज्य संबंध यदि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और राज्य में कांग्रेस सरकार होती है, तो वित्तीय सहायता, परियोजनाओं और राजनीतिक मुद्दों पर टकराव संभव है। इन सभी गंभीर मुद्दों के रहते क्या कांग्रेस स्थिर सरकार चला पाएगी यह काफी हद तक मुख्यमंत्री के चयन और गठबंधन प्रबंधन पर निर्भर करेगा। यदि कांग्रेस ऐसा नेता चुनती है जो सहयोगियों और गुटों को साथ रख सके, तो सरकार स्थिर रह सकती है। लेकिन यदि अंदरूनी खींचतान बढ़ी, तो विपक्ष इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करेगा।
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