CURATED BY – RAJEEV KHARE CITYCHIEFNEWS

बीजापुर/दंतेवाड़ा, कभी गोलियों की आवाज़ों से कांप उठने वाला कर्रेगुट्टा इलाका अब नई सुबह देखने जा रहा है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर फैले इस घने और दुर्गम जंगल क्षेत्र में, जहाँ इसी साल वसंत में सुरक्षाबलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया था, अब केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) एक विशेष स्कूल खोलने जा रही है।
यह कदम सिर्फ शिक्षा के विस्तार का नहीं, बल्कि “शांति और विश्वास” की जड़ों को मजबूत करने का प्रतीक माना जा रहा है।

इलाके में नई उम्मीद का केंद्र
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, CRPF ने इस इलाके में सर्वेक्षण शुरू कर दिया है ताकि स्कूल के लिए उपयुक्त स्थान तय किया जा सके। कर्रेगुट्टा पहाड़ियां लगभग 60 किलोमीटर लंबी और 5 से 20 किलोमीटर चौड़ी हैं। इस क्षेत्र में घने जंगल, पत्थरीली घाटियाँ, गुफाएँ और पुराने नक्सली बंकरों के अवशेष हैं।
जंगल में मधुमक्खियों, चमगादड़ों, भालुओं और जंगली कीड़ों की मौजूदगी इसे एक “प्राकृतिक प्रशिक्षण क्षेत्र” जैसा बनाती है, जो अब शिक्षा और समुदाय विकास का नया प्रतीक बनेगा।
जहाँ मौत की छाया थी, वहाँ अब ज्ञान की रोशनी
बीजापुर और मुलुगु जिलों के सीमावर्ती इस क्षेत्र में कभी माओवादियों का जबरदस्त प्रभाव था। “ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट” के तहत CRPF, कोबरा और स्थानीय पुलिस ने यहाँ एक ऐतिहासिक अभियान चलाया था जिसमें भारी संख्या में नक्सली मारे गए और हथियार बरामद हुए थे।
अब इसी इलाके को बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय युवाओं के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है। स्कूल में स्थानीय आदिवासी बच्चों के लिए आवासीय सुविधा, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, और डिजिटल शिक्षा की भी व्यवस्था होगी।
स्थानीय समुदाय की भूमिका
CRPF के अधिकारी बताते हैं कि इस स्कूल को “सिविक एक्शन प्रोग्राम” के तहत चलाया जाएगा ताकि स्थानीय गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
गांवों के मुखिया और जनजातीय प्रतिनिधियों को भी इस परियोजना में जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि अब बच्चे स्कूल जाएंगे, जंगल नहीं।
स्थानीय समाजसेवियों का मानना है कि शिक्षा ही वह रास्ता है जिससे बंदूक की जगह किताबें पकड़ाई जा सकती हैं।

कठिन भूभाग, कठिन तैयारी
यह इलाका अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। न बिजली का भरोसा, न सड़क का स्थायी रास्ता। गर्मियों में तापमान 45 डिग्री तक पहुँच जाता है और बारिश के मौसम में नदियाँ उफनकर इलाके को बाकी दुनिया से काट देती हैं।
CRPF इस चुनौती को स्वीकार कर रही है और स्कूल के साथ एक छोटा स्वास्थ्य केंद्र, जलाशय, और सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की भी योजना बना रही है।
नए दौर की शुरुआत
राज्य सरकार ने इस परियोजना को “विकास और विश्वास मिशन” से जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने इसे “सशस्त्र संघर्ष से सामाजिक पुनर्निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है।
अधिकारियों का मानना है कि यह स्कूल न केवल बच्चों को शिक्षा देगा बल्कि सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच भरोसे की खाई को भी पाटेगा।
बीजापुर से बस्तर तक — विकास की नई रफ्तार
    •    नक्सल सरेंडर: हाल ही में 60 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें एक ज़ोनल कमांडर भी शामिल था।
    •    नई सड़कें: अबूझमाड़ से महाराष्ट्र को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 130-D की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
    •    स्थानीय रोज़गार: CRPF कैंपों के आसपास 300 से अधिक ग्रामीणों को निर्माण और आपूर्ति कार्यों में रोज़गार मिलेगा।
जहाँ कभी सुरक्षा बलों को दुर्गम पहाड़ियों में छिपे नक्सलियों का सामना करना पड़ता था, वहीं अब बच्चों की हंसी, खेल और पढ़ाई की आवाज़ गूंजेगी।
यह पहल बताती है कि बंदूक से जीते गए युद्धों से अधिक ताकतवर होती है वह जीत — जो शिक्षा, विश्वास और विकास से हासिल होती है।