भरौली स्थित सीमेंट फैक्ट्ररी से ग्रामीणों को हो रही परेशानी
कन्वेयर बेल्ट की आवाज से ग्रामीण बहरेपन का हो रहे शिकार, पढ़ाई में व्यवधान
CURATED BY – SHRINIVAS MISHRA | CITYCHIEFNEWS
मैहर, एमपी बिरला से लगी पंचायतों के निवासियों को न दवा, न डॉक्टर सिर्फ मिल रहा धुंआ और डस्ट जिससे अधिकांश ग्रामीण विभिन्न बिमारियों का शिकार बनते जा रहे है। ग्राम पंचायत भरौली में एक बड़े सीमेंट प्लांट से लगे कन्वेयर बेल्ट की आवाज लोगों को बहरा करने पर उतारू है। धुआं बड़ी समस्या का कारण बनता जा रहा है जिससे ग्राम पंचायत भरौली सहित इटहरा, भैंसासुर, खेरवा कलॉ, सढ़ेरा व इसके साथ लगती पंचायतों मंे प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
क्ष्ोत्रीय ग्रामीणों के द्बारा बताया जा रहा है कि जब से एमपी बिरला सीमेंट फैक्ट्ररी लगी है तब से इस क्ष्ोत्र के लोग कई समस्याओं से जूझ रहे है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सीमेंट प्लांट से निकलने वाला धुंआ और डस्ट से आस पास के गांव की फसले चौपट हो जाती है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार भी बनते जा रहे है। क्ष्ोत्रीय ग्रामीणों के द्बारा बताया जा रहा है कि सीमेंट प्लांट से निकलने वाले डस्ट ख्ोतों की फसलों के ऊपर जम जाती है जिससे फसल खराब हो जाती है साथ ही धूल जमने जमीन बंजर होती जा रही है।
कन्वेयर बेल्ट से लोग हो रहे बहरे
इसी तरह बताया जा रहा है कि सीमेंट प्लांट से सढ़ेरा जाने वाली खदान तक लगी कन्वेयर बेल्ट से निकलने वाली दिन रात खड़-खड़ की आवाज से आस पास रहने वालें लोग बहरे और नींद पूरी न होने से मानसिक बीमारी का शिकार हो रहे है। कई बार कन्वेयर बेल्ट से पत्थरों के टुकड़ों के गिरने से राहगीर चोटिल हो जाते है।
स्कूली बच्चों पर बुरा असर
कन्वेयर बेल्ट के नीचे स्थित हरिजन बस्ती के पास बने शासकीय प्राथमिक शाला हरिजन बस्ती में पढ़ने बच्चों की अभी से श्रवण शक्ति कमजोर हो जाने के कारण बहनेपन का शिकार हो गए है। कन्वेयर बेल्ट से निकलने वाली आवाज के कारण पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होता है। इसी तरह जो टीचर है ऊंचा सुनने की आदी हो गए है। फैक्ट्ररी के आस पास रहने वाले ग्रामीणजन बताते है कि कुंओं एवं हैण्डपंपों में दूषित पानी आ रहा है जिसको पीने से तरह तरह की बीमारी हो रही है।
बच्चोंग्रामीणों के द्बारा बताया गया है कि इस क्ष्ोत्र के लोग सीमंेट फैक्ट्ररी के कारण बीमार हो रहे है मगर सीमेंट फैक्ट्ररी के द्बारा एक भी अस्पताल नहीं बनवाया गया है जिससे लोगों को बीमारी से मुक्ति मिल सके और जो लोग बीमार हो जाते है अपने खर्चे से बाहर जाकर उपचार कराते है। ग्रामीणों ने बताया है कि एक एम्बुलेंस टाइप की एक गाड़ी आती है जिसमे कोई डॉक्टर नहीं रहता है कंपाउडर एक रहता है जो ग्रामीणों के द्बारा बीमारी बताएं जाने पर बिना जांच किए रंग बिरगी कुछ गोलियां दे जाती है। जब कि टीबी, श्वास एवं दमा के मरीज देखे जा रहे है।