नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं में बड़े बदलाव का दावा करते हुए आज से देशभर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी VB G-RAM-G लागू करने की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत रोजगार की वार्षिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जबकि न्यूनतम दैनिक मजदूरी भी बढ़ाकर 327 रुपये से अधिक निर्धारित की गई है।

सरकार का कहना है कि यह नई योजना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिसमें आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग के जरिए पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया गया है।

UPA सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी मनरेगा

वर्ष 2004 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आधारभूत संरचना के विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) लागू किया था। इस योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ तालाब, कुएं, ग्रामीण सड़कें और जल संरक्षण जैसी सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करना था।

वर्ष 2009 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) कर दिया गया, जिसे UPA सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करती रही।

VB G-RAM-G: तकनीक आधारित नई व्यवस्था

करीब दो दशक बाद अब सरकार ने VB G-RAM-G के रूप में नई व्यवस्था लागू करने का दावा किया है। नई योजना में पारदर्शिता और निगरानी के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जीपीएस आधारित वर्कसाइट मॉनिटरिंग, मोबाइल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रियल टाइम ऑडिट सिस्टम को शामिल किया गया है।

सरकार का मानना है कि इन तकनीकों के इस्तेमाल से फर्जी जॉब कार्ड, गलत भुगतान और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा तथा परियोजनाओं की प्रगति की तत्काल निगरानी संभव होगी।

100 की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी

नई योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों को अब साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है, जबकि मनरेगा के अंतर्गत यह सीमा 100 दिन थी। इसके साथ ही दैनिक मजदूरी को औसतन 298.80 रुपये से बढ़ाकर 327.40 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, नई मजदूरी दरें देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

सालाना आय में होगा इजाफा

नई व्यवस्था के तहत मजदूरों को अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार मिलने से उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पहले 100 दिन के रोजगार पर लगभग 29,880 रुपये की आय होती थी, जबकि अब 125 दिन के कार्य के बदले करीब 40,925 रुपये प्राप्त होंगे। इस प्रकार अतिरिक्त कार्यदिवसों और बढ़ी हुई मजदूरी के कारण वार्षिक आय में लगभग 10,500 रुपये तक की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।

राज्यों की वित्तीय भागीदारी बढ़ी

नई योजना के तहत वित्तीय ढांचे में भी बदलाव किया गया है। मनरेगा में श्रम मद का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि सामग्री लागत का अनुपात 75:25 था। अब VB G-RAM-G के तहत राज्य सरकारों की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है।

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच व्यय का अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है, जबकि अन्य राज्यों और विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह 60:40 होगा। जिन केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं है, वहां का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

कृषि सीजन में नहीं मिलेगा योजना का लाभ

नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के प्रमुख कृषि मौसम की अवधि घोषित करेंगी। इस दौरान योजना के अंतर्गत रोजगार की मांग नहीं की जा सकेगी। सरकार का तर्क है कि इससे कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सरकार का दावा है कि विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) योजना, तकनीक आधारित पारदर्शिता, बढ़े हुए रोजगार और बेहतर मजदूरी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।