खगड़िया, खगड़िया में पुलिस के पास जब्त मोबाइल के यूपीआई से एक लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हो गया। अब पुलिस इसे हैकर की करतूत बता अपने पल्ले झाड़ रही है। जबकि जिस यूपीआई से रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया है, वो मोबाइल पुलिस ने जप्त की हुई है। ऐसे में खगड़िया पुलिस सवालों के घेरे में लग रही है। दरअसल बीते माह महेशखूंट के राजधाम पैक्स अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह की हत्या हुई थी। इसकी घटना के बाद पुलिस ने मृतक के कॉल डीटेल के अनुसार इस मामले में महेशखूंट थाना क्षेत्र के बिचली टोल निवासी जयप्रकाश चौरसिया और उसके पुत्र नीरज कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह गिरफ्तारी घटना से कुछ घंटे पहले मृतक के मोबाइल पर आरोपी नीरज के मोबाइल से कॉल के आधार पर की थी। जिसके घर में खून लगे कपड़े और तीन मोबाइल जब्त किया गया था। इसी जप्त मोबाइल में आरोपी का मोबाइल नंबर 6205524818 भी था।

जब्त मोबाइल से कैसे गए पैसे
गौरतलब है कि आरोपी नीरज कुमार और उसके पिता को पुलिस ने 2 जनवरी की आधी रात गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद नीरज को पुलिस ने 3 जनवरी को जेल भेज दिया। वहीं उसके पिता जयप्रकाश चौरसिया को छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले दिन 4 जनवरी को जेल भेजे गए नीरज के जप्त मोबाइल से उसके पिता के खाते में एक लाख का यूपीआई ट्रांजेक्शन किया गया। मामले में गोगरी एसडीपीओ रमेश कुमार की माने तो जब्त मोबाइल का कोई डुप्लीकेट सीम नहीं निकला है। मतलब ट्रांजेक्शन पुलिस के पास जब्त मोबाइल से की गई। जबकि एसडीपीओ का कहना है कि यह ट्रांजेक्शन हैकर ने कर लिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर मोबाइल से किसी हैकर ने ट्रांजेक्शन किया तो वह रकम आरोपी के पिता के खाते में कैसे पहुंची।


पिता के खाते में क्यों भेजे गए?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के पास जब्त मोबाइल से रुपये आरोपी के पिता के खाते में क्यों भेजे गए? आरोपी नीरज के मोबाइल यूपीआई से उसके पिता के एसबीआई खाता संख्या 31071695396 में रुपया कैसे मिला। ये ऐसा सवाल है जो पुलिस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आरोपी के पिता को छोड़ने के लिए पिता के खाते में जप्त मोबाइल से रुपये भेजे गए। 

अब पल्ले रही झाड़ पुलिस
इस मामले में खगड़िया पुलिस सवालों से बचना चाह रही है। एसडीपीओ रमेश कुमार से जब इसको लेकर सवाल अमर उजाला की तरफ से पूछा गया तो वे काफी असहज हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसको लेकर जानकारी दे दी है। जबकि एसडीपीओ ने कहा कि नीरज के मोबाइल की यूपीआई से ट्रांजेक्शन हुआ है। उनका कहना है कि मोबाइल के सीडीआर में कोई अन्य सीम निकालने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ट्रांजेक्शन हैकर के द्वारा की गई होगी। एसडीपीओ की माने तो मोबाइल सीडीआर में कोई ओटीपी की भी पुष्टि नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि यूपीआई ट्रांजेक्शन में ओटीपी नहीं यूपीआई पिन डाला जाता है तो उन्होंने चुप्पी साध ली।

आरोपी नीरज के पिता का भी हाथ है
बता दें कि मृतक पैक्स अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह की हत्या से पहले बीते वर्ष 30 दिसंबर को हत्या आरोपी नीरज के खाते में 125550 रुपये आरटीजीएस किए गए थे। मृतक की पत्नी रीता देवी का आरोप है कि उनके पति की हत्या में आरोपी नीरज के पिता का भी हाथ है। जिसे पुलिस ने छोड़ दिया है। पत्नी ने पुलिस के वरीय अधिकारियों को आवेदन देकर इस मामले की गंभीर जांच की मांग की है।