सारंगपुर, बंधुओं, जीवन में धर्म का होना बहुत आवश्यक है। जब तक आत्मा में पवित्रता नहीं आती, तब तक जीव संसार के चक्रव्यूह से मुक्त  नहीं हो सकता। भगवान महावीर ने जो मार्ग दिखाया है, वह सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का मार्ग है। अपने भीतर के दोषों को देखना ही सच्ची साधना है। यह प्रवचन स्थानीय राठी मांगलिक परिसर में आयोजित धर्मसभा में राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज ने बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों के बीच दिए। अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में धर्म, संयम, सदाचार एवं आत्मकल्याण का संदेश देते हुए महाराजश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि एवं मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना है। उन्होंने समाजजनों से धर्म के प्रति आस्था, संस्कारों की रक्षा तथा सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इसके पहले मंगलवार सुबह सकल दिगम्बर जैन समाज सारंगपुर के तत्वावधान में परम पूज्य मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज ससंघ का नगर में भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। श्रद्धालुओं ने अरोरा पेट्रोल पंप, भावना होटल, गणेश विहार पर गुरुदेव की अगवानी कर भाव-विभोर वातावरण में जयघोष के साथ स्वागत किया। अगवानी के पश्चात विशाल चल समारोह भावना होटल, गणेश विहार से प्रारंभ होकर नया बस स्टैंड सहित विभिन्न मार्गों से होता हुआ राठी मांगलिक परिसर पहुंचा, जहां समारोह का समापन हुआ। मार्ग भर श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के दर्शन कर धर्म लाभ प्राप्त किया तथा भक्ति  एवं श्रद्धा का अनुपम वातावरण बना रहा। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सकल दिगम्बर जैन समाज सारंगपुर के अध्यक्ष मनोज जैन ने किया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष पंकज पालीवाल, पूर्व अध्यक्ष पं. ललित पालीवाल एवं प्रदीप सादानी, पूर्व मंडल अध्यक्ष गोकुल दंडवानी एवं विजय बरडिया, श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष निर्मल जैन, प्रदीप जैन, श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष सुमत जैन, चातुर्मास सेवा समिति के अध्यक्ष अनिल जैन, विजय जैन, दीपक जैन, लतेश सिंघई, विवेक जैन, चंद्रकुमार जैन, सुरेश जैन, संजय डैडी, पंकज जैन, दीपेश जैन, नरेंद्र जैन, श्रीपाल जैन, अनिमेष जैन, गुणधर जैन , संजय जैन, दीपेश जैन, सौरभ जैन, अजय जैन , अनमोल जैन, अरुण जैन, जैनपाल जैन, संजय जैन, मुनि सेवा समिति अध्यक्ष पारस जैन, पंकज डैडी सहित बडी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज की आहारचर्या विकास जैन (जेलर), निर्मल जैन तथा चंद्रकुमार जैन के निवास पर संपन्ना हुई। वहीं मुनि संघ की आहारचर्या का सौभाग्य सकल दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष मनोज जैन, अजय जैन, वर्धमान सिंघई, सुरेश जैन, निर्मल जैन, मयंक श्रीमाल सहित अनेक श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। सम्पूर्ण आयोजन श्रद्धा, अनुशासन एवं भक्ति के वातावरण में संपन्ना हुआ।

धर्मात्मा को देखकर धर्मात्मा बने
राठी परिसर में मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि गुरु के दर्शन तो सभी करते हैं। लेकिन ये तद्रूप होने का भाव, जैसे आपको धनी आदमी को देख करके तो कैसा लगता है? धनी की प्रशंसा ही करते रह जाते हो कि मन में आता है कि मैं धनी? तो धनी को देख कर धनवान बनने का भाव तो बहुत बार आता है, कभी धर्मात्मा को देखकर धर्मात्मा बनने का भाव आ जाए। धर्मात्मा को देखकर धर्मात्मा बनना, एक अच्छे आदमी की प्रशंसा करना सरल है। लेकिन वैसा अच्छा होने का भाव करना, अपन सौ बार कह देंगे भैया ये बहुत..."उससे अलग नहीं है, और मैं धर्म से अलग नहीं हूँ। कोई दुनिया की ताकत मेरे धर्म को मेरे से अलग नहीं कर सकती। और कितना भी कोई लोभ देवे, मैं धर्म से अलग नहीं हो सकता। महाराजश्री ने कहा कि हमको यह भी कोई नियम नहीं है,ए लेकिन दुनिया में एक सत्य है जहाँ धर्म है, वहाँ धर्मात्मा है। और जहाँ धर्मात्मा है, वहाँ धर्म है। दोनों अलग नहीं होते। महाराजश्री ने आगे कहा कि महान आत्माओं का क्यों विस्मरण दें। मर्यादा पुरुषोत्तम ex राम क्यों अमर हुए? क्यों सारा जगत उनका नाम लेता है? उनकी एक ही बात थी कि सब कुछ उनका था, सब कुछ उनका था। और कुछ भी उन्हें नहीं दिया गया है। एक बार तो मन में तो उसके शमन होना चाहिए था। मन में तो भाव आना चाहिए था, लेकिन नहीं आया क्यों?।महापुरुषों की कथाएँ ही मत पढ़ा करो। मैंने कहा ना हर कथा को दर्पण माना करो और दर्पण में स्वयं की जिंदगी को ढालो। जब कोई कल्पना तुम्हारे सामने आए, किसी महापुरुष की कथा को, कथा तो उसकी पढो, दर्पण तो देखो, लेकिन अनुभव करो। हमें किसी के पीछे न दौडना पडे और कोई हमारे पीछे न दौडे, समझ लेना तुम्हारा चैतन्य प्रभु प्रकट हो गया है। भगवान आत्मा की शक्ति  प्रकट हो गई। ऐसी शक्ति  जिस आत्मा में प्रकट हो जाती है, वह व्यक्ति  अपने आप में पूर्णता का अनुभव करता है। फिर वह उसी शक्ति  के साथ रहता है, जहाँ धर्म है।

आप लोग प्रशंसा करते हो, मैं इससे खुश
प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने कहा कि यहाँ सबसे ज़्यादा झूठ बोलो तो चल जाता है। क्योंकि रिसॉर्ट में झूठ और साची का कोई मूल्य नहीं। लेकिन इस समय ये रिसॉर्ट नहीं है, इस समय तुम्हारे सामने गुरु बैठे हैं। लेकिन गुरु के इशारे...खास यह चर्या तुम पालन करोगे तो कैसा रहेगा। मेरी चर्या की मैं प्रशंसा नहीं सुनना चाहता हूँ। आप लोग प्रशंसा करते हो, मैं इससे खुश नहीं हूँ। महाराज जी, ये दिगंबर मुनि की बहुत चर्या है, बहुत कठिन साधना है, बहुत कठिन तपस्या है। प्रशंसा के पुल तुम इतने बांधते हो। मैं ये नहीं मानता। सारंगपुर में कार्यक्रम के पश्चात दोपहर 3 बजे महाराजश्री ने सारंगपुर से पनवाड़ी(शाजापुर) के लिए विहार किया और गांधी चौक स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ सांरगपुर सहित शाजापुर, उज्जैन, इंदौर, शुजालपुर, आगर, ब्यावरा, पचोर आदि स्थानों से बड़ी संख्या समाजजन शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि महाराजश्री  बजरंग गढ़ से इंदौर चौमासा के लिए जा रहे है, उनके साथ 20 मुनिश्री भी पदयात्रा कर रहे है।