नई दिल्ली, भारतीय केबल एवं वायर उद्योग में दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा नए दौर में पहुंच गई है। आदित्य बिड़ला ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा अपने नए बिजनेस 'अल्ट्रावोल्ट' (Ultravolt) वायर्स एंड केबल्स के औपचारिक लॉन्च की घोषणा के बाद बाजार में स्थापित कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली दर्ज की गई।

समय से पहले किए गए इस रणनीतिक कदम से केबल और वायर मार्केट के मौजूदा स्ट्रक्चर में बड़े फेरबदल की आशंका पैदा हो गई है, जिस पर अब तक पॉलीकैब इंडिया, KEI इंडस्ट्रीज और RR काबेल जैसी कंपनियों का वर्चस्व रहा है।

केबल शेयरों पर बिकवाली का दबाव
अल्ट्राटेक के इस कदम का सबसे बड़ा असर सेक्टर की अग्रणी कंपनियों पर पड़ा:

KEI इंडस्ट्रीज: सबसे ज्यादा प्रभावित, शेयर 6% से अधिक टूटे।

अन्य प्रमुख कंपनियां: पॉलीकैब इंडिया (Polycab India), RR काबेल, हैवेल्स इंडिया (Havells India), फिनोलेक्स केबल्स और V-Marc इंडिया के शेयरों में भी 4% तक की तीव्र गिरावट दर्ज की गई।

₹1,800 करोड़ का बड़ा दांव और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
अल्ट्राटेक ने इस नए सेगमेंट के लिए ₹1,800 करोड़ के पूंजीगत निवेश (Capex) की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी ने अपनी पूर्व निर्धारित समय-सीमा से पहले ही 'अल्ट्रावोल्ट' को बाजार में उतारकर आक्रामक इरादे साफ कर दिए हैं। अल्ट्राटेक का स्पष्ट लक्ष्य अगले पांच वर्षों के भीतर भारत की शीर्ष दो केबल और वायर कंपनियों में स्थान हासिल करना है।

बाजार की प्रतिक्रिया: अल्ट्राटेक के शेयरों में बढ़त
जहां एक ओर प्रतिस्पर्धी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, वहीं अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में निवेशकों का भरोसा दिखा और स्टॉक बढ़त के साथ ₹11,343 के स्तर पर पहुंच गया।

मार्केट कैप: कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (M-Cap) ₹3.34 लाख करोड़ के करीब बना हुआ है।

वार्षिक प्रदर्शन: वर्ष 2026 में अब तक अल्ट्राटेक का शेयर 4.8% नीचे आया है, जबकि इसी अवधि के दौरान बेंचमार्क निफ्टी 50 में 8.6% की गिरावट देखी गई है।

अल्ट्राटेक के व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और मजबूत ब्रांड वैल्यू को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना है कि 'अल्ट्रावोल्ट' का प्रवेश इस सेक्टर में मूल्य-प्रतिस्पर्धा (Price Competition) और मार्जिन पर दबाव को बढ़ा सकता है।