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शहडोल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यूजीसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहडोल संभाग के  पं. शंभू नाथ शुक्ल विश्वविद्यालय सहित मध्य प्रदेश के 18 विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर घोषित किया है। सभी विश्वविद्यालयों को छात्रों की शिकायत के निराकरण के लिए समिति के गठन और लोकपाल की नियुक्ति में लापरवाही का दोषी पाया गया है। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से की अपनी वेबसाइट और कैंपस के प्रमुख जगहों पर लोकपाल और छात्र शिकायत निवारण समिति की जानकारी फोन नंबर प्रदर्शित करें। इस कार्यवाही में देश के 421 विश्वविद्यालयों को लिया गया है। 
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के 421, म.प्र. के 18 विश्वविद्यालयों सहित शहडोल संभाग मुख्यालय स्थित पं. शंभूनाथ शुक्ल विवि को डिफॉल्टर घोषित किया है। सभी विश्वविद्यालयों को छात्रों की शिकायत के निराकरण के लिए समिति के गठन और लोकपाल की नियुक्ति में लापरवाही का दोषी पाया गया है।
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को निर्देश देते हुए कहा था कि अपनी वेबसाइट और कैंपस के प्रमुख जगहों पर लोकपाल और छात्र शिकायत निवारण समिति की जानकारी और फोन नंबर प्रदर्शित करें। इसके लिए 31 दिसंबर 2023 की डेडलाइन तय की थी, लेकिन दिए गए समय में इन विश्वविद्यालयों ने लोकपाल नियुक्त नहीं किए। 
लोकपाल की नियुक्ति संबंधी निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण मध्य प्रदेश के जिन 18 विश्वविद्यालय के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए डिफाल्टर घोषित किया गया है। 
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को 11 अप्रैल 2023 को छात्र शिकायत निवारण प्रकोष्ठ और लोकपाल की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। इस नोटिस पर 30 दिन में कार्रवाई करके जवाब देना था। यूजीसी ने इसके बाद कई बार नोटिस जारी करके विश्वविद्यालयों को सतर्क किया। आखिर में 31 दिसंबर का अंतिम नोटिस का भी निर्देश नहीं मानने के बाद सभी विश्वविद्यालयों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया।
डिफाल्टर लिस्ट में आने वाले विश्वविद्यालयों को यूजीसी से मिलने वाली मदद पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। यूजीसी अपने रेग्युलेशन के तहत अनुदान रोक सकती है। सरकार की अन्य योजनाओं के तहत अनुदान को भी रोकने की कार्रवाई सकती है।