काठमांडू / नई दिल्ली, प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे नेपाल पर अब एक और बड़ी तबाही का साया मंडरा रहा है। तिब्बत सीमा के पास बनी दो नई झीलों के कारण उत्पन्न हुए भीषण खतरे को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने त्रिशूली और भोटेकोशी नदी के तटीय क्षेत्रों में 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया है। एहतियात के तौर पर निचले इलाकों के गांवों को खाली करा लिया गया है। इस बीच, देश में आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है, जबकि 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

100 टन TNT ब्लास्ट जैसी तबाही का खतरा
तिब्बत में प्योरपु त्सांगपो नदी के समीप बनी पहली झील का क्षेत्रफल लगभग 99 हजार वर्ग मीटर (14 फुटबॉल मैदानों के बराबर) है, जिससे लगातार जल का रिसाव जारी है। वहीं, ग्लेशियर के ठीक नीचे स्थित दूसरी झील और भी विशाल है—करीब 1 लाख 20 हजार वर्ग मीटर (17 फुटबॉल मैदानों के बराबर)। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये झीलें फटती हैं, तो इसका असर लगभग 100 टन TNT विस्फोट जितना भीषण हो सकता है। इससे नेपाल में 26 अगस्त को आई आपदा से भी अधिक विनाशकारी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी राहत आंकड़े
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है। अब तक लगभग 4,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, संकट में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए अभियान तेज गति से चलाया जा रहा है:

विवरण    संख्या
नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीय नागरिक    108
जिन भारतीय नागरिकों से पुनः संपर्क स्थापित हुआ    50
चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुंचे भारतीय    598
चीन से निकलने की प्रतीक्षा में भारतीय    900
लापता भारतीय नागरिक    275
लापता भारतीय मूल के अन्य लोग    128
अगले 72 घंटे बेहद संवेदनशील: भारी बारिश का अलर्ट
नेपाल मौसम विभाग ने रसुवा जिले के लिए 30 अगस्त से 1 सितंबर तक 75% बारिश की संभावना जताते हुए नया अलर्ट जारी किया है। लगातार भारी बारिश से जलस्तर और बढ़ने की आशंका है, जिससे राहत कार्यों में गंभीर बाधा आ सकती है।

जमीनी हालात: बुनियादी ढांचा ध्वस्त, भारत से मदद की उम्मीद
बाढ़ और मलबे से रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। तिनोरे और सियाफ्रूब बेसी जैसे इलाके पूरी तरह वीरान और मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।

ऊर्जा संकट: बटार क्षेत्र में नदियों के उफान ने पावर स्टेशन, सोलर प्लांट और विद्युत विभाग के वर्क स्टेशन को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए नेपाल अब भारत की तकनीकी सहायता ले रहा है।

ऑन-साइट मेडिकल सुविधा: रसुवा से रेस्क्यू किए जा रहे नागरिकों के लिए सेना के कैंपों में राहत शिविर बनाए गए हैं। अब बचाव टीमें अपने साथ मेडिकल किट और डॉक्टर लेकर सीधे घटनास्थल पर जा रही हैं ताकि घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जा सके।

तबाही के इस खौफनाक मंजर के बीच उम्मीद की एक किरण भी चमकी है—रेस्क्यू टीम ने मलबे के नीचे कई घंटों तक दबी रही एक 97 वर्षीय वृद्धा को जीवित सुरक्षित बाहर निकाल लिया।