बिहार सरकार ने पुनौराधाम को अयोध्या धाम के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई है। सीतामढ़ी जिले में देवी सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम का विशेष धार्मिक और पर्यटन महत्व है। हिंदू धर्मावलंबी भगवान राम के साथ देवी सीता की भी पूजा करते हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का विकास किया गया है और यह श्रद्धालुओं के लिए बहुत आकर्षण का केंद्र बन गया है। अयोध्या और पुनौराधाम के बीच सीधा संपर्क है। व्यापक जनहित में श्रद्धालुओं की भावना और पर्यटन के व्यापक विकास की संभावना को ध्यान में रखते हुए मौजूदा पुनौराधाम को रामायण सर्किट के रूप में विकसित करना समीचीन है ताकि अयोध्या धाम से सीधा संपर्क हो सके। और चूंकि, अब तक यहां बहुत कम विकास हुआ है। बिहार सरकार ने पुनौराधाम को अयोध्या धाम के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई है।

सीतामढ़ी जिले के पुनौरा गांव में स्थित पुनौरा मठ (श्री सीता जन्म कुण्ड स्थल (श्री जानकी जन्म भूमि, पुनोरा धाम मंदिर) एक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है और पर्षद के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के तहत कार्य कर रहा है। चूँकि, बिहार राज्यपाल का समाधान हो गया है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है, जिनके कारण बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम-01, 1951) को इसके पश्चात् विहित रीति से संशोधित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है। इसलिए अब भारत संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल निम्नलिखित अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं।

(1) यह अध्यादेश बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास (संशोधन) अध्यादेश 2025 कहा जा सकेगा।

(2) यह अध्यादेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रनावी होगा ।2 धारा 32 में संशोधन। बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 में उपधारा 32(5) को निम्नलिखित रूप में अंतःस्थापित किया जाएगा-

(5) (1) बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 सहित किसी प्रावधान के होते हुए भी, राज्य सरकार पुनौराधाम मंदिर, सीतामढ़ी के विकास के लिए एक योजना बना सकेंगी, जिसमें भूमि और सभी परिसंपत्तियों का प्रशासन शामिल है। इस योजना में अन्य बातों के साथ-साथ विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण शामिल होगा, ताकि इसे राष्ट्रीय महत्व का धार्मिक और पर्यटन आकर्षण का स्थान बनाने के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकें।

(ii) राज्य सरकार विकास योजना के प्रशासन के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तियों की समिति गठित कर सकेगी।

(iii) इस अध्यादेश के लागू होने की तिथि से पुनौराधाम मंदिर की वर्तमान न्यास समिति मंग मानी जाएगी। सभी पदाधिकारी कार्य करना बंद कर देंगे।

परंतु न्यास के विद्यमान महथ को राज्य सरकार द्वारा गठित की जाने वाली समिति में शामिल किया जाएगा।

परंतु और भी. न्यास के सभी कर्मचारी अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित समिति के पूर्ण नियंत्रण के अधीन रहते हुए न्यास की सेवा करते रहेंगे।

(iv) राज्य सरकार द्वारा गठित की जाने वाली समिति, न्यास और उसकी सभी मूर्त और अमूर्त परिसंपत्तियों के प्रबंधन का पूर्ण नियंत्रण तुरंत अपने हाथ में ले लेगी।

(v) राज्य सरकार द्वारा गठित समिति राज्य सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

(vi) राज्य सरकार योजना के उचित कार्यान्वयन के हित में समिति को निर्देश जारी कर सकती है और ऐसे निर्देश बाध्यकारी होंगे।

(vii) राज्य सरकार न्यास के समुचित विकास के हित में वर्तमान योजना को संशोधित, परिवर्तित या प्रतिस्थापित कर सकेगी। राज्य सरकार किसी भी समय समिति का पुनर्गठन कर सकेंगी, जिसमें नए सदस्यों को शामिल करना या वर्तमान सदस्यों को बाहर करना शामिल है।

(viii) अधिनियम की धारा 28 के अंतर्गत पर्षद की सामान्य शक्तियां और कर्तव्य न्यास पर लागू रहेंगे।