रात को मशाल और दिन में निकला दुलदुल-ताजियों का जुलूस, दस दिवसीय मोहर्रम का हुआ समापन
ऐतिहासिक नाल साहब की सवारी में हजारों लोग हुए शामिल
CURATED BY – BHAGWAN DAS BERAGI | CITYCHIEFNEWS
शाजापुर, दुलदुल-बुर्राक और ताजियों के जुलूस के साथ दस दिवसीय शहादत के पर्व मोहर्रम का समापन बुधवार को हुआ। गौरतलब है कि मोहर्रम की शुरूआत के साथ ही मुस्लिम समाजजनों ने शोहदा-ए-कर्बला की याद में दूध और शरबत पिलाने के साथ ही दुरूद और फातेहा पढऩा शुरू कर दिया था। साथ ही गली-मोहल्लों में आका हुसैन के नाम पर दस दिनों तक लंगर भी लुटाया गया। वहीं नगर में अखाड़ों के साथ दुलदुल और बुर्राक का जुलूस निकालते हुए अखाड़ों के उत्साही युवाओं ने क्रूर शासक यजीद पलीत को सांकेतिक रूप से ललकारते हुए ताजियों के समक्ष करतब दिखाए। मोहर्रम की दस तारीख को समाज के लोगों ने योमे आशूरा मनाया और इस दिन आशूरे की नमाज अदा की गई। साथ ही कर्बला के प्यासे शहीदों को याद करते हुए जगह-जगह लोगों को सबिल पिलाने के साथ ही हलीम पर फातेहा पढक़र अकीदतमंदों में तकसीम किया गया।
नौ की रात निकली नाल साहब की सवारी
मोहर्रम की नौ तारीख मंगलवार को नगर में रात के समय नाल साहब की सवारी मशाल जुलूस निकाला गया। नाल साहब की सवारी मशाल जुलूस रात लगभग 10.30 बजे पिंजारवाड़ी क्षेत्र से शुरू हुआ, जो नगर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ गुजरा। जुलूस के दौरान समाज के युवा, या हुसैन के नारे लगा रहे थे। वहीं आगे-आगे युवा हाथ में मशाल लिए हुए चल रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था बनाने के लिए पुलिसबल जुलूस के साथ-साथ चल रहा था। जंजीरों में जकड़े नाल साहब की हुसैनी चौक में दुलदुल के समक्ष सलामी कराई गई।
कांधों पर निकले दुलदुल और बुर्राक
मोहर्रम की 10 तारीख पर बुधवार को परंपरानुसार नगर में जरकी बुर्राक के साथ अन्य छोटे-बड़े दुलदुल और ताजियों का जुलूस भी निकाला गया। वहीं इस इस दिन वारसी परिवार द्वारा पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए नारियल में पैसे बांधकर लुटाए गए जिसे लूटने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं इसी रात 11 बजे जुलूस का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें नगर के सभी मोहल्लों के अखाड़े, दुलदुल, ताजिये निकाले गए। इसके बाद सुबह 5 बजे ताजिये ठंडे किए गए और इसके साथ ही मोहर्रम पर्व का समापन हो गया।
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