CURATED BY – UMESH KUSHWAHA | CITYCHIEFNEWS

सतना, दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश एवं जिला प्रशासन सतना व चित्रकूट क्षेत्र की जनता जनार्दन के सहयोग से चित्रकूट में पारम्परिक नृत्य एवं गायिकी केन्द्रित तीन दिवसीय शरदोत्सव की समापन संध्या में मुम्बई के इंडियन आइडल फेम गायक पवनदीप राजन एवं अरुणिता कांजीलाल की जोड़ी ने अपने गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को भाव विभोर किया। उन्होंने अपने अंदाज में गायन का ऐसा जादू चलाया कि लोग गुलाबी ठंड और भींगी भीगी ओस के बीच में देर रात्रि तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। शरदोत्सव की समापन संध्या का शुभारंभ पूज्य संत राम जी दास महाराज संतोषी अखाड़ा, पूज्य संत श्री दीनदयाल जी महाराज निर्मोही अखाड़ा, राजेंद्र शुक्ला उप मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन, श्रीमती कृष्णा गौर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, वंचित घुमंतू एवं घुमंतू कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश शासन, श्रीमती महापौर भोपाल, आलोक संजर पूर्व सांसद भोपाल, सुनील पांडे पूर्व उपाध्यक्ष भोपाल विकास प्राधिकरण, चित्रकूट किशोर जी और लता जी के अन्य गीतों पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह, रमेश सिंह सामाजिक कार्यकर्ता, मोतीलाल गोयल उद्योगपति एवं सामाजिक कार्यकर्ता, संजय श्रीवास्तव आरटीओ सतना, नरेंद्र गुप्ता सामाजिक कार्यकर्ता, जयदेव ताम्रकार कार्यकर्ता दीनदयाल शोध संस्थान ने दीप प्रज्वलन कर किया। दीनदयाल परिसर चित्रकूट में आयोजित शरदोत्सव की समापन संध्या को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख का स्मरण करते हुए कहा कि नानाजी के कृतित्व ने भगवान राम की तपोस्थली एवं वन प्रांतर अंचलों में चैतन्यता जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा और प्रेरणा से उनके बताये मार्ग पर क्षेत्र का उत्थान किया जा सकता है। नाना जी सदैव कहते थे कि संस्कारित विकास एवं अनुशासन ही देश को महान बनाता है। श्रेष्ठ पुरुषों के कृतित्व और व्यक्तित्व से आने वाली पीढ़ी मार्गदर्शन लेकर सही मार्ग पर चलती है। श्रीमती कृष्णा गौर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा कि विश्व में समाज सेवा के क्षेत्र में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्य एक अनुकरणीय मॉडल है। नाना जी एक सफल राजनीतिज्ञ भी थे वह योजना निर्माण कर साथ साथ उसके सफल कियान्वयन हेतु सदैव सजग रहते थे। संतोषी अखाड़ा के महंत राम जी दास महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि चित्रकूट की जागृति, प्रभुता और सम्पत्रता यह सब नानाजी के आने से हुई है। नानाजी सम्पूर्ण राष्ट्र में एक जन जागृति लाते हैं। सेवा का भाव और मानव समाज के लिए समर्पण का भाव से नानाजी ने एक अलग उदाहरण समाज में प्रस्तुत किया है। शरदोत्सव की आखिरी शाम बॉलीवुड स्टार इंडियन आइडल फेम पवनदीप राजन और अरुणिता कांजीलाल के नाम रही। जिन्होंने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजूबर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ में स्टेज पर अरुणिता पहुंची और उन्होंने ठुमक चलत रामचंद्र भजन से सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। फिर पल पल से दोनों सिंगर जोड़ी ने शमा बांध दिया। समापन तेरी मिट्टी में मिल जावा गीत की शानदार परफॉरमेंस के साथ हुआ। पचनदीप एवं अरुणिता के गानों का.

लोगों ने देर रात तक जमकर लुत्फ उठाया। पवनदीप राजन के गाने को सुनने ठहर जाओ', आने वाला कल, तू जो मिल गया, अगर तुम साथ हो, तेरी दुआ सुन ले जरा, आओ पधारो पिया आदि गीतों से समा बांधा। फिर एक के बाद एक बॉलीवुड गीत 'ओ रे मनवा' और 'खामोशियां' जैसे बेहतरीन गानों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। दर्शक भी अरुणिता के साथ ताल से ताल मिला कर गाने लगे। इसके बाद स्टेज पर पवनदीप अपनी परफॉर्मेंस देने पहुंचे। उन्होंने 'जो तुम ना हो' गाने से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की और फिर कबीर सिंह फिल्म का 'कैसे हुआ' गाना जैसे ही स्टेज पर गाना शुरू किया दर्शक दीर्घा में तालियां और सीटियां बजने लगी। 'ले जाए जाने कहां हवाएं' गाने पर सभी श्रोता झूमने लगे। कार्यक्रम में के लिए  चित्रकूट, सतना ही नहीं चल्कि आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। गौर हो कि देर रात तक चले रंगारंग कार्यक्रम में लोग पवनदीप के गानों पर जमकर थिरके। शरदोत्सव के आखिरी संध्या के कार्यक्रम की कर्णप्रिय और मधुर उद्घोषणा चित्रकूट में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रामायण मेला में श्रीराम का किरदार निभाने वाले देवर्षि नागर ने की। तीन दिनी शरदोत्सव समारोह का आभार प्रकट करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि शरदोत्सव के जरिये देश की लोक संस्कृति, लोककलाओं और अन्य लोक विधाओं को सुरक्षित रखा जा सके इसी उद्देय से शरदोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस प्रयास में संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश, जिला प्रशासन सतना और चित्रकूट क्षेत्र की जनता जनार्दन के सहयोग से दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट का यह संयुक्त आयोजन पारम्परिक सांस्कृतिक कलाओं को मंच प्रदान कर उसे गौरवान्वित कर क्षेत्रीय लोगों को आनंद और सुख प्रदान करते हुए सांस्कृक्ति धरोहर को संरक्षित करने का माध्यम है। शरदोत्सव के समापन पर संगीत का आनन्द लेने के लिये बहुत बड़ी तादाद में जन सैलाब उपस्थित रहा। फतेहपुर, झांसी, प्रयागराज, बांदा, सतना, पत्रा, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा आदि जिलों से तमाम लोगों का हुजूम शरदोत्सव देखने के लिये चित्रकूट आया।

प्रसिद्ध गायकों ने शरदोत्सव में छोड़ी अमिट छाप
राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के जन्मोत्सव से प्रारम्भ हुए तीन दिनी शरदोत्सव में अब तक देशभर के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देकर शरदोत्सव को अविस्मरणीय बना चुके है। प्रमुख रूप से अब तक प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल, स्वीन्द्र जैन, सुरेश वाडेकर, मनोज तिवारी, पवन तिवारी, विनोद राठौर, कैलाश खैर, नितिन मुकेश, प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा एवं नृत्यांगना डोना गांगुली, सुधा चन्दन, डिम्पल डिप्युटी शाह, ग्रेसी सिंह, मोहित चौहान, उदित नारायण की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव को ऐतिहासिक बनाने में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।