नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा छात्र आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ तीसरे दौर की वार्ता के बाद CJP के प्रतिनिधियों ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। बैठक में CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

प्रतिनिधियों के अनुसार, केंद्र सरकार ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने सहित कई मांगों पर सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की है। आशुतोष रांका ने बताया कि इन फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए CJP का प्रतिनिधिमंडल एक महीने बाद सरकार के साथ दोबारा बैठक करेगा।

आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार रहे सौरव दास

जंतर-मंतर पर शुरू हुए आंदोलन से लेकर सरकार के साथ वार्ता तक सौरव दास CJP के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। संगठन से जुड़ने से पहले वे खोजी पत्रकार और सूचना का अधिकार (RTI) कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने कानून, न्यायपालिका, शासन, अपराध और पारदर्शिता जैसे विषयों पर स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम किया है। वह जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले क्लाइमेट एक्शन फ्रंट के सह-संस्थापक भी हैं।

एमिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई, RTI के जरिए बनाई पहचान

सौरव दास ने एमिटी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार की शिक्षा प्राप्त की। 18 वर्ष की आयु से ही उन्होंने सूचना के अधिकार कानून के तहत सरकारी संस्थानों से जानकारी जुटाने का काम शुरू किया। आरटीआई के माध्यम से किए गए उनके कई खुलासों को विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। वर्ष 2020 से उन्होंने पेशेवर लेखन और स्वतंत्र पत्रकारिता की शुरुआत की।

उन्होंने सूचना तक पहुंच और पारदर्शिता से जुड़े मामलों में कई कानूनी पहल भी कीं। कोविड-19 महामारी के दौरान सूचना संबंधी अपीलों में देरी के मुद्दे पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका दावा है कि इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने महामारी से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाई।

पहली किताब पर भी कर रहे हैं काम

CJP से जुड़ने के बाद सौरव दास राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। आंदोलन के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रों के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। फिलहाल वह अपनी पहली पुस्तक "Complicit Silence: The Court's Role in India's Quiet Suffering" पर काम कर रहे हैं, जिसमें न्याय व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।

कौन हैं आशुतोष रांका?

CJP के प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल आशुतोष रांका का पेशेवर अनुभव सार्वजनिक नीति और प्रबंधन पर आधारित रहा है। राजस्थान के जयपुर निवासी रांका ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

कॉरपोरेट से पब्लिक पॉलिसी तक का सफर

उच्च शिक्षा के बाद आशुतोष रांका ने लंदन में मैकिन्जी एंड कंपनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में कार्य किया। कुछ वर्षों तक कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर सार्वजनिक नीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया।

सुशासन और युवाओं से जुड़े अभियानों में सक्रिय

आशुतोष रांका सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी और सुशासन से जुड़े विभिन्न अभियानों का हिस्सा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में दिल्ली सरकार में एसोसिएट फेलो के रूप में भी काम कर चुके हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने राजस्थान में शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और युवा कल्याण जैसे विषयों पर कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है।

जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने CJP की ओर से सरकार के साथ संवाद स्थापित करने और आंदोलन की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समझौते के बाद आंदोलन समाप्त होने के साथ दोनों चेहरे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।