बलिया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश की राजनीति में यह सवाल भी उठने लगा है कि इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा या फिर इसे 2027 के विधानसभा चुनाव तक खाली रखा जाएगा। अंतिम निर्णय अब चुनाव आयोग को लेना है।

बसपा का विधानसभा में खत्म हुआ प्रतिनिधित्व

उमाशंकर सिंह ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा सीट से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को पूरे उत्तर प्रदेश में केवल एक सीट मिली थी और उमाशंकर सिंह ही पार्टी के एकमात्र विधायक थे। उनके निधन के बाद अब विधानसभा में बसपा का कोई भी प्रतिनिधि नहीं बचा है।

क्या हर खाली सीट पर उपचुनाव जरूरी होता है?

संविधान और चुनावी नियमों के अनुसार, किसी विधायक के निधन, इस्तीफे या सदस्यता समाप्त होने पर संबंधित विधानसभा सीट रिक्त मानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी सीट पर उपचुनाव कराया जाता है, ताकि क्षेत्र को नया जनप्रतिनिधि मिल सके।

हालांकि, नियम यह भी कहते हैं कि यदि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने में एक वर्ष से कम समय शेष हो, तो चुनाव आयोग परिस्थितियों को देखते हुए उपचुनाव नहीं कराने का निर्णय भी ले सकता है।

2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर क्या बन सकती है स्थिति?

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव मार्च 2027 के आसपास प्रस्तावित है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण होगा कि रसड़ा सीट कब आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित होती है और उस समय विधानसभा का कितना कार्यकाल शेष रहता है।

यदि चुनाव आयोग को लगेगा कि कार्यकाल का पर्याप्त समय बाकी है, तो सीट पर उपचुनाव कराया जा सकता है। वहीं, यदि कार्यकाल समाप्त होने में एक वर्ष से कम समय बचता है, तो आयोग उपचुनाव न कराने का फैसला भी ले सकता है।

अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

सबसे पहले विधानसभा सचिवालय रसड़ा विधानसभा सीट को औपचारिक रूप से रिक्त घोषित करेगा। इसके बाद चुनाव आयोग उपलब्ध समय, प्रशासनिक स्थिति और कानूनी प्रावधानों का आकलन कर यह निर्णय करेगा कि उपचुनाव कराया जाए या मतदाताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना होगा।

बसपा के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान

उमाशंकर सिंह केवल एक विधायक ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल में बहुजन समाज पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 में लगातार रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की थी।

जब 2022 के चुनाव में बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी, तब उमाशंकर सिंह ने ही विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में उनका निधन बसपा के लिए केवल एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि संगठन और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी बड़ा झटका माना जा रहा है। अब पार्टी के सामने पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।