आज देशभर मे भारी सुरक्षा के इंतजामों के बीच NEET-UG परीक्षा दोबारा
एग्जाम में 22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी हो सकते है शामिल
नई दिल्ली, देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG पिछले कुछ वर्षों से लगातार विवादों में रही है वर्ष 2024 में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों ने पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। वहीं वर्ष 2026 में भी पेपर लीक और परीक्षा की गोपनीयता भंग होने के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को पूरी परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लेना पड़ा। केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी और व्यापक सुरक्षा सुधारों की घोषणा की जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंच गया था आरोप लगा कि संगठित गिरोहों ने अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने का नेटवर्क तैयार किया था इन घटनाओं ने परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए इसी कारण लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए परीक्षा को निरस्त कर पुनः आयोजित करने का फैसला लिया गया जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क कोचिंग और दलाल तंत्र से जुड़े संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं जिससे कई राज्यों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं हालांकि अंतिम रूप से दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी केंद्र सरकार ने मामले की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों और सीबीआई को सक्रिय किया है परीक्षा रद्द होने का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ा लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी करनी पड़ रही हैं परीक्षा की तिथि बदलने से मानसिक तनाव अनिश्चितता और आर्थिक बोझ बढ़ा दूर-दराज क्षेत्रों से परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों को यात्रा आवास तथा अन्य खर्चों का सामना करना पड़ा कई छात्रों ने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर परीक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास भी व्यक्त किया।
जिससे नीट विवाद ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हुए छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की और कई याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट ने भी लगातार हो रही घटनाओं को गंभीर बताते हुए केंद्र और NTA से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा वहीं NTA ने परीक्षा रद्द होने के बाद पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया इस पुनर्परीक्षा में लगभग 22 से 23 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान है हालांकि परीक्षा को लेकर कुछ याचिकाएं अभी भी न्यायालय में लंबित हैं। पुनर्परीक्षा के लिए देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं राज्य सरकारों जिला प्रशासन, पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और NTA के बीच समन्वय स्थापित किया गया है कई राज्यों में परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और अति संवेदनशील श्रेणियों में बांटकर विशेष निगरानी रखी जा रही है पुनर्परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए NTA ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं सभी परीक्षा केंद्रों पर व्यापक सी. सी. टी वी निगरानी ए. आइ आधारित कैमरा मॉनिटरिंग,बायोमेट्रिक और फेस वेरिफिकेशन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित पैकिंग और ट्रैकिंग,परीक्षा से पहले मॉक ड्रिल,बिजली आपूर्ति और तकनीकी बैकअप की विशेष व्यवस्था,सिग्नल जैमर की तैनाती,प्रश्नपत्रों को सुरक्षित वॉल्ट में 24 घंटे सुरक्षा के बीच रखना। इसके आलवा केंद्र सरकार ने राज्यों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं कई स्थानों पर पुलिस, अर्धसैनिक बल और प्रशासनिक अधिकारियों की विशेष तैनाती की गई है परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है कुछ क्षेत्रों में प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं नीट विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। केंद्र सरकार, NTA और न्यायपालिका सभी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार किए जाएं लाखों विद्यार्थियों का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा है इसलिए उनकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।
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