दिल्ली, दिल्ली में कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन उस समय और उग्र हो गया जब संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया इसके बाद देशभर में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोप में कई एफआईआर दर्ज कीं पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया जबकि अनुमति नहीं थी दूसरी ओर आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया विपक्ष ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भी खड़े हुए केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है सरकार ने प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों से बातचीत की पहल भी की केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ आंदोलन के प्रतिनिधियों की बैठक की कोशिश हुई हालांकि सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की बात भी दोहराई सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार पेपर लीक रोकने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा रहे हैं साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम मे विदेशी मीडिया क्यों कूदी रॉयटर्स, द गार्जियन और अल जज़ीरा जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को भारत के युवाओं के बड़े आंदोलनों में से एक बताया कई रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और युवाओं की नाराजगी का उल्लेख किया गया जब कि विदेशी मीडिया स्वतंत्र पत्रकारिता के तहत दुनिया के विभिन्न देशों की घटनाओं पर रिपोर्ट प्रकाशित करता है उन्हें किसी भी देश के अंदरूनी मामलों पर कानूनी निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता लेकिन वे उपलब्ध तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों, सरकारी बयानों और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के आधार पर समाचार प्रकाशित कर रहें हैँ उनकी रिपोर्टें भारत की न्यायिक या सरकारी प्रक्रिया को बाध्य नहीं कर सकती लाठीचार्ज के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई हालांकि मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया अदालत ने प्रारंभिक उल्लेख के दौरान वीडियो देखने से भी मना किया और कहा कि इस स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप उचित नहीं है इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले का अंतिम फैसला हो गया है बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की गई सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हैं उन्हें अनशन के दौरान स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल ले जाया गया था उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी हालत स्थिर बताई गई है उन्होंने कहा है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने या सार्थक समाधान मिलने पर ही वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर आंदोलन जारी है आंदोलनकारी शिक्षा सुधार,परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कर रही है जबकि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रही है आने वाले दिनों में न्यायालय की आगे की सुनवाई सरकार और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता तथा राजनीतिक घटनाक्रम इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे।