ईरान इराक औऱ अमेरिका के बीच चल रहें युद्ध से देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और संसाधनों की खपत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल, डीजल, खाने के तेल, फर्टिलाइज़र और सोने की खरीद में संयम बरतने की अपील के बाद अब इसका असर केंद्र से लेकर राज्यों तक दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद सरकारी विभागों और मंत्रालयों में खर्चों में कटौती तथा सादगी अपनाने को लेकर हलचल तेज हो गई है। राजधानी में दिल्ली सरकार ने सरकारी खर्च और ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों को घर से कार्यालय तक बस सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम किया जा रहा है, ताकि निजी वाहनों के उपयोग को कम किया जा सके माना जा रहा है कि इससे पेट्रोल-डीजल की बचत के साथ-साथ ट्रैफिक और प्रदूषण में भी कमी आएगी। प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई राज्य सरकारें भी फिजूलखर्ची रोकने और सरकारी सादगी नीति को सख्ती से लागू करने में जुट गई हैं इसी बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा और सख्त एक्शन लेते हुए पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है बताया जा रहा है कि पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान लगभग 200 गाड़ियों की रैली निकाली गई थी, जिस पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने तत्काल संज्ञान लिया। सरकार ने इस वाहन रैली को फिजूलखर्ची, शक्ति प्रदर्शन और शासन की सादगी नीति के खिलाफ माना है मामले की जांच पूरी होने तक सौभाग्य सिंह के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं। साथ ही निगम कार्यालय, सरकारी वाहन, संसाधनों, बैठकों और कर्मचारियों के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए दिखावा, अनुशासनहीनता और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सरकार की सख्त कार्यशैली और सादगी अभियान के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।