वीरता और स्वाभिमान की मिसाल महाराणा प्रताप की जयंती 29 मई को विक्रम संवत् अनुसार मनाई जाएगी
विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का किया जाएगा आयोजन
CURATED BY – RAJEEV KHARE | CITYCHIEFNEWS
रायपुर, भारतभूमि के अमर रक्षक, मातृभूमि के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले महान योद्धा महाराणा प्रताप की जयंती इस वर्ष 29 मई को विक्रम संवत् पंचांग के अनुसार पूरे सम्मान और परंपरा के साथ मनाई जाएगी। रायपुर ज़िले के बिरगांव स्थित बनजारी माता मंदिर प्रांगण में आयोजित इस समारोह में सभी समुदायों की सहभागिता रहेगी और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अखिलेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि महाराणा प्रताप जयंती विक्रम संवत् के अनुसार ही मनाई जानी चाहिए, न कि अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर के आधार पर। उन्होंने कहा, “जब महाराणा प्रताप का जन्म हुआ, उस समय अंग्रेजी कैलेंडर का अस्तित्व ही नहीं था। उस काल में विक्रम संवत् का उपयोग होता था। अंग्रेजी कैलेंडर 1582 में दुनिया में लागू हुआ और भारत में इसका प्रचलन 1752 के बाद शुरू हुआ। ऐसे में किसी भी ऐतिहासिक महापुरुष की जयंती को उस युग के पंचांग से जोड़कर ही मनाना यथोचित और सम्मानजनक है।”
श्री सिंह ने कहा कि “हम पितृ पक्ष, दीपावली, दशहरा, होली और नवरात्र जैसे सभी प्रमुख पर्व भारतीय पंचांग के अनुसार मनाते हैं, तो फिर महाराणा प्रताप जैसी विभूति की जयंती को अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर मनाना हमारी परंपरा के विपरीत है। आज भी हमारे कई भाई 9 मई को अंग्रेजी कैलेंडर से यह जयंती मनाते हैं, जो ऐतिहासिक दृष्टिकोण से उचित नहीं है।”
उन्होंने यह भी बताया कि महाराणा मेवाड़ की उपस्थिति में उदयपुर में आयोजित एक अखिल भारतीय सभा में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि महाराणा प्रताप की जयंती विक्रम संवत् के अनुसार ही मनाई जाएगी, जिससे हमारी सांस्कृतिक चेतना और गौरव अक्षुण्ण बना रहे।
श्री अखिलेश सिंह ने अंत में सभी संगठनों और देशवासियों से अपील की:
“मैं समस्त राष्ट्रभक्तों, संगठनों और बंधुजनों से आग्रह करता हूं कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और न केवल इस वर्ष, बल्कि आने वाले सभी वर्षों में भी, महाराणा प्रताप सहित सभी महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि विक्रम संवत् के अनुसार ही मनाएं। यही उनके प्रति सच्चा सम्मान और हमारी सांस्कृतिक चेतना का संरक्षण है।”
महाराणा प्रताप केवल एक ऐतिहासिक योद्धा नहीं, बल्कि वह आदर्श हैं जो आत्मगौरव, स्वाधीनता और मातृभूमि के प्रति निष्ठा के प्रतीक हैं। उनकी स्मृति को सच्चे अर्थों में जीवंत रखने का कार्य तभी संभव है जब हम उन्हें उनके युग के अनुसार स्मरण करें — न कि पश्चिमी गणनाओं से।
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