नई दिल्ली, नीट-यूजी  2026 पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के बाद देशभर के छात्रों में नाराजगी बढ़ी इसी माहौल में सोशल मीडिया पर शुरू हुआ कॉकरोच जानता पार्टी  सीजपी नाम का व्यंग्यात्मक अभियान धीरे-धीरे छात्र आंदोलन में बदल गया बाद में इसका केंद्र नई दिल्ली का जंतर-मंतर बना जहां से आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान मिली शुरुआत में आंदोलन का मुख्य मुद्दा केवल नीट पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार था लेकिन समय के साथ इसमें शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल हो गई आंदोलन में देशभर के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी कई शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और बाद में विभिन्न विपक्षी दलों के नेता भी समर्थन में उतर आए हालांकि CJP ने कई बार कहा कि उसका आंदोलन छात्रों का है और किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक मंच नहीं है आंदोलन को सबसे अधिक गति तब मिली जब दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ लाठीचार्ज, हिरासत और बल प्रयोग के आरोपों के बाद यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया इसके बाद मुंबई, बेंगलुरु, पटना, लखनऊ सहित कई शहरों में छात्रों ने समर्थन प्रदर्शन किए विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा और संसद के भीतर तथा बाहर इस मुद्दे को उठाया शुरुआत मे तो इस आंदोलन कों विपक्षीयो कि साजिश भी कहा जाने लगा था पर इस सवाल पर अलग-अलग पक्षों के अलग-अलग दावे रहे सरकार समर्थक नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है वहीं सीजपी और आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं ने लगातार कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाना है अब तक ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें पूरे आंदोलन को किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा घोषित किया गया हो करीब एक महीने तक आंदोलन राष्ट्रीय बहस का विषय बना रहा सोशल मीडिया पर #नीट , #पेपरलीक और #सीजपी जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए संसद का मानसून सत्र भी इस मुद्दे से प्रभावित रहा और सरकार पर लगातार दबाव बना रहा इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी छात्र चुनौती के रूप में भी देखा गया दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर धारा 163 जैसे प्रतिबंध लागू किए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और संसद क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाई कुछ समय के लिए जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास यातायात तथा मेट्रो सेवाओं पर भी असर पड़ा बाद में केंद्र सरकार ने सी.जे.पी प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की आंदोलन के दौरान  सीजपी ने मुख्य रूप से ये मांगें रखी 1.केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 2.परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस व्यवस्था  3.प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेना तथा भविष्य में कार्रवाई न करना 4.नीट विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा और जवाबदेही तय करना सरकार और सीजपी के बीच कई दौर की बातचीत के बाद महत्वपूर्ण सहमति बनी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर काम करने परीक्षा सुधारों पर विचार करने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने तथा दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया जो आंदोलन की सबसे प्रमुख मांगों में शामिल था करीब 37 दिनों तक चले आंदोलन के बाद सीजेपी ने घोषणा की कि सरकार ने उसकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं इसके बाद जंतर-मंतर का धरना समाप्त कर दिया गया और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौटने की अपील की गई हालांकि सीजेपी नेताओं ने कहा कि आंदोलन भले समाप्त हो गया हो लेकिन शिक्षा सुधार और जवाबदेही की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।