CURATED BY – MOHMMAD MUNEER | CITYCHIEFNEWS

शहडोल, जिले में अवैध खनन पर उतारू रेत माफिया का जारी खूनी खेल की घटनाक्रम और वारदातों में कमी की जगह इजाफा हो रहा है, जिसकी निंदा भले ही समूचे मध्यप्रदेश के राजनीतिक दलों के शीर्ष पदाधिकारियों ने की लेकिन शहडोल जिले में सारे के सारे नेताओं सहित जिम्मेदार अधिकारियों को मानो साफ सूंघ गया खास तौर पर रेत मामले को लेकर राजनीती में आगे आने वाले  युवा ब्यौहारी विधायक शरदकोल भी मानो मानवीय संवेदनाओं का मूल्य ही भूल बैठे है.......पटवारी एएसआई मामले में माननीय ना मृतक परिजनों की सुध लेने पहुंच सके ना कहीं कोई सरकारी, ना राजनीतिक जन-प्रतिनिधियों का कंधा पटवारी की अंतिम यात्रा का हिस्सा बन पाया बल्कि एएसआई की मौत मामले में पुलिस ने नरम रुख इख्तियार करते हुई यथासंभव प्रयास किये जिसकी सराहना भी की जा रही है लेकिन एक ही जिले में कैसा दोहरा कानून जो एक को एक करोड़ दूसरे को रोगी कल्याण समिति से 25 हज़ार की राशि से राहत दिला इतिश्री कर ली फिर बाद में मिली जानकारी के वो पैसा भी परिजनो ने कलेक्टर को वापस कर दिए यह रवैया समझ से परे है।

मर गई इंसानियत....

ज्जिले में एक के बाद एक घटनाक्रम के बावजूद रेत को लेकर विवादित रसपुर. पोंडी, से लेकर दो दर्जन अवैध रेत के ठीहे गुलजार है जिसकी रोक टोक करने वालो को मानवीय जिले से बाहर भेज देने का माद्दा तो रखते है, माननीय  शहडोल वो यही जिला है जहां कुछ दिनों पहले अपराधियों और माफियाओ पर पुलिस का ऐसा खौफ था कि पुलिस सायरन बजने से अवैध कारोबारियों की रूह कांप जाती है, आपकी भी काँपी थी, जिसके चलते अपराधी स्वयं को सुरक्षित रखने पड़ोस जिले में पनाह लेने को मजबूर थे । तब जिला जीरो टॉलरेंस पर काम करता था आज वो दिन हवा हो गए, पहले के अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर और माफियाओं को बचाने की खातिर तात्कालिक एसपी अवधेश कुमार गोस्वामी का स्थानांतरण को लेकर ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक शरद कोल ने तो एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था । लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री जीरो टॉलरेंस को लेकर बेहद संजीदा थे और लाख दबाव आया किसकी बात नहीं मानी ।

की कार्यवाही हुआ तबादला....

सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीते नगरीय निकाय चुनाव के पूर्व अमरपाटन विधायक, शहडोल के पालक मंत्री ने भी अवधेश गोस्वामी को जिले से अन्यत्र ट्रांसफर किए जाने की सिफारिश की इनकी सिफरिश चुनाव में फ्री फ्रीडम को लेकर मान ली गई।  हम आपको बता दें कि जिले में कुमार प्रतीक की पदस्थापना के बाद से ही कानून व्यवस्था मानो दम तोड़ती नजर आई, लंबे अरसे बाद ही सही एक बार फिर माफियातंत्र इस कदर रिएक्टिवेट हो गया और आज माफियाओं ने अपना दसों दिशाओं में तांडव मचाया हुआ है, इस मामले में भी खुफिया जानकारी के मुताबिक कोयलांचल के एक सेठ ने लगभग चालीस पेंटी ढ़ीली कर मन मुताबिक पुलिस अधीक्षक की पदस्थापना आदेश को हरी झंडी दिखाई, ताकि सेठ के इशारे पर कठपुतली की तरह काम करें संभवतः हो वैसे ही रहा है।

कप्तान कि विवादित इंट्री बनी सुर्खिया....
पीएचक्यू से सीधा शहडोल एसपी की पदस्थापना होते ही शुरुआती दिनों में ही अमलाई थाना में शिकायत लेकर आई एक महिला को ही पुलिस ने ही उल्टा परेशान किया गया, परेशान महिला अमलाई थाना परिसर में ही खुद को आग के हवाले कर लिया, भूमाफिया को निस्तनाबूद करने वाली सत्ता में आसीन सरकार शहडोल में सरकारी भूमि हड़पने वाले अभिषेक मिश्रा नमक व्यक्ति पर रहमदिली दिखा रही है, आर टी आई से मिली जानकारी के मुताबिक दर्जनों धाराओं में दर्ज मुकदमे जिनमे 307 का भी मामला दर्ज है इतना ही नहीं इनका पूरा कुनबा शासकीय भूमि, आदिवासी कि भूमि, तालाब कि भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्ज़ा करते हुए उक्त कब्जाई भूमि से कमर्शियल उपयोग कर हर माह 5 लाख रूपए से ऊपर अवैध उगाही कर रहे है, जिनकी शिकायते लगभग एक साल से बंद फाइलों में धूल खा रही है, अभिषेक मिश्रा पर 49  लाख रूपए कि धोखाधड़ी कि भी शिकायत थाने पहुंची लेकिन माफियाओ का तगड़ा मैनेजमेंट थाने में कार्यवाही की जगह समझौता करवा देता है आज 11 माह में पुलिस ने केवल टालमटोल किया और इस बीच फरयादी महिला ने आत्मदाह का दिया लेकिन मजाल है पुलिस आरोपी का कुछ कर पाए। जबरन की दी छूट शहडोल में लूट को बढ़ावा दे रही है।

पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला
लगतार माफिया के खिलाफ शिकायतकर्ताओ की शिकायत के आधार पर समाचार प्रकाशित किये जाने से तिलमिलाए अभिषेक मिश्रा पुरानी बस्ती ने बेटू चौबे, अजित, रोशन यादव, सहित सफ़ेद जुपिटर जिसका नंबर सीसीटीवी वीडियो फोटो में दिख रहा है इन लोगो ने सिंदूरी में पलानिंग की और अपना अपना मोबाइल वहा नियोजित तरीके से रखा, जिससे पुलिस को गुमराह करना आसान हो, लेकिन पत्रकार प्राण घघाटक हमला करने वालो में से दो नकाब पोश लोगो ने अपने गुरु से बात की जिसका संभवतः पीएसटीएन डाटा खगाला जा चुका, लेकिन आज तक नामजद आरोपी खुले आम घूम रहे है फरयादी पत्रकार ने एसपी एडीजीपी सहित डीजीपी भोपाल एवं प्रेस कौंसिल को लिखे शिकायतीपत्र में व्यथा बताते हुए कहा है उसकी जान को खतरा है जिला प्रसाशन जानबूझ कर अनदेखी कर रही है माफिया ने मुझे खरीदने की कोशिश की जब मैंने मना कर दिया तो जान लेना चाहता है, और इसके साथ साथ मुझे झूठे केश मुकदमो में फसाने की साजिश चल रही है, मतलब चोर साहूकार और कठघरे में ईमानदार, शायद इसी को माफिया सिंडिकेट कहा जाता है।