नई दिल्ली, बीते कई महीनों में कई इंडियन और मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने यहां कर्मचारियों की छंटनी की है. छंटनी करने वालों में मेटा, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. वहीं, स्विगी, क्रेड, डन्जो, मीशो जैसे इंडियन स्टार्टअप्स ने भी बड़ी मात्रा में अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है.

छंटनी में निकाले गए कर्मचारियों को दूसरी कंपनियां या तो हायर ही नहीं कर रही हैं और अगर हायर कर रही हैं तो उनको पिछली कंपनी के बराबर पैकेज नहीं दे रही हैं. स्विगी से निकाले गए एक शख्स ने लिंक्डइन पर पोस्ट किया है कि बीते 3 महीनों से वो रोज सैकड़ों कंपनियों में जॉब के लिए अप्लाई करते हैं, पर ज्यादातर जगहों से कोई जवाब नहीं आता है. कुछ जगहों पर इंटरव्यू के लिए बुलाया गया लेकिन उन्होंने भी जॉब ऑफर नहीं की.

उम्मीद अब खत्म हो रही है

लिंक्डइन यूजर ने लिंक्डइन पर जॉब ढूंढने में मदद की अपील की है. उन्होंने लिखा, “मैं तीन महीने से बेरोजगार हूं. मैं रोज 100 से ज्यादा नौकरियों के लिए अप्लाई करता हूं. अब तक केवल 4-5 जगहों पर इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, पर कोई जवाब नहीं आया. अब सर्वाइव करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि मैं अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य हूं.”

यूजर ने आगे लिखा, “मेरा परिवार पूरी तरह मुझ पर निर्भर है. हालात मुश्किल होते जा रहे हैं. मैं कोशिश कर रहा हूं, अपना बेस्ट देने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन अब मेरी उम्मीद खत्म हो रही है. अगर मेरे कनेक्शंस में कोई या आपके कनेक्शन में कोई मुझे गाइड कर सके या मेरी मदद कर सके और अच्छा सुझाव दे सके तो पर्सनल मैसेज करें.”

स्विगी ने लेऑफ की वजह क्या बताई थी?

स्विगी ने 20 जनवरी को छंटनी का ऐलान किया था. अपने वर्कफोर्स में करीब 6 फीसदी की कटौती करते हुए स्विगी ने 380 कर्मचारियों की छंटनी की थी. स्विगी ने कहा था कि उसने ओवरहायरिंग कर ली थी यानी जरूरत से ज्यादा लोग रख लिए थे. इसके साथ ही स्विगी ने कारण बताया था कि स्विगी की ग्रोथ रेट में गिरावट आई है, जिसकी वजह से कंपनी के प्रॉफिट्स और इनकम में कमी आई है.