CURATED BY – UMESH KUSHWAHA | CITYCHIEFNEWS

सतना, भ्रांति ऐसी भी, ग्रामीण काट रहे पेड़ बद्दू ने बताया कि उसने सात साल में इधर-उधर से लाकर सैकड़ों पेड़ लगाए। इस कार्य में ग्राम पंचायत या प्रशासन ने किसी प्रकार की मदद नहीं की। उल्टा पीपल के पेड़ में प्रेत आत्माओं का वास होता है इस भ्रांति के चलते गांव के कुछ लोग उसके लगाए पेड़ चोरी छिपे काट देते हैं। सात साल में पीपल के 50 से अधिक तैयार पेड़ ग्रामीणों ने काट दिए। इसके बावजूद हार नहीं मानी और सूखे पेड़ों की जगह पीपल की नई पौध तैयार की। पेड़ लगाने के लिए पैसा या किसी के सहयोग की जरूरत नहीं होती। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो बंजर जमीन में भी जंगल उगाया जा सकता है। इसे सिद्ध कर दिखाया है क्षेत्र में द माउंटेन मैन के नाम से प्रसिद्ध नचना गांव के 85 वर्षीय बद्दू कोरी ने मरू भूमि में जंगल उगाकर। जिला मुख्यालय से महज 15 किमी की दूरी पर जैतवारा कस्बे से लगे नचना गांव के वृद्ध बद्दू कोरी पढ़े लिखे नहीं हैं फिर भी पर्यावरण के प्रति उनके दिल में ऐसा प्रेम जागा कि उन्होंने श्मशान के लिए आरक्षित गांव की बंजर जमीन (जिसमें घास भी नहीं उगती थी) में अपने जज्बे और जुनून के दम पर सात साल में 2350 पेड़ लगाकर जंगल खड़ा कर दिया। जो अब श्मशान आने वाले लोगों को छाया देने के साथ गांव को शुद्ध आक्सीजन भी दे रहे हैं।
पेड़ों के लिए छोड़ा परिवार: बद्दू ने कहा, वह पेड़ लगाने के लिए अपना पूरा समय श्मशान भूमि में देने लगा तो बच्चों ने विरोध किया। परिवार कार्य में बाधा बना तो उन्होंने घर छोड़कर गांव से दूर अलग झोपड़ी बना ली और पेड़ लगाने और उनको संरक्षित में दिन रात जुटे रहे।
बद्दू ने बताया कि सात साल पहले गांव के एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर वह अंतिम संस्कार में शामिल होने श्मशान गया था। गर्मी के दिन थे। वहां एक भी पेड़ न होने से सभी लोग धूप से छटपटा रहे थे। इससे परेशान गांव के मुखिया व लोगों ने कहा कि बद्दू तुम श्मशान में पीपल का एक पेड़ लगा, दो इससे यहां आने वालों को छाया मिलेगी और जब तक वह पेड़ रहेगा, गांव में तुम्हारा नाम चलेगा। यह बात बद्दू के दिल में घर कर गई और उसने श्मशान भूमि को उपवन बनाने की ठानी। जी जान से पेड़ लगाने में जुट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बद्दू ने श्मशान भूमि में लगाए गए पौधों की परवरिश बच्चों जैसे की है। तब कहीं जाकर छोटे पोधे बंजर जमीन में पेड़ का रूप ले पाए हैं। नदी का पानी सूख जाने पर बद्दू छह माह एक किमी दूर हैंडपंप से घड़े में पानी ढोकर पेड़ों की सिंचाई करते हैं। गर्मी में यदि कोई पौधा झुलसने लगता है तो उसे लू से बचाने अपना गमझा और बगली उतार कर पेड़ को ओढ़ा देते हैं।