ड्रग्स केस में आया श्रीकांत का नाम
पुलिस ने साउथ एक्टर को किया गिरफ्तार, चल रही है पूछताछ
नई दिल्ली, साउथ एक्टर श्रीकांत का नाम ड्रग्स केस में आया है. नुंगमबक्कम पुलिस ने गिरफ्तार कर कर लिया है और अब उनसे पूछताछ हो रही है. यह जांच तब शुरू हुई, जब एआईएडीएमके के पूर्व सदस्य को ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में प्रसाद ने श्रीकांत को भी ड्रग्स सप्लाई करने की बात कबूली थी. फिलहाल जांच अभी भी जारी है.
श्रीकांत पर आरोप है कि उन्होंने एआईएडीएमके से निष्कासित किए गए प्रसाद से ड्रग्स खरीदे और उनका सेवन किया. इसके बाद चेन्नई पुलिस ने श्रीकांत को गिरफ्तार कर लिया. जांच के दौरान यह सामने आया कि गिरफ्तार किया गया प्रदीप कुमार एआईएडीएमके के पूर्व पदाधिकारी प्रसाद को ड्रग्स बेच रहा था. पुलिस की आगे की पूछताछ में यह भी पता चला कि ये ड्रग्स बेंगलुरु में रहने वाले एक नाइजीरियन नागरिक से मंगवाए जा रहे थे.
कैसे आया श्रीकांत का नाम?
जब एआईएडीएमके पदाधिकारी से पूछताछ के दौरान श्रीकांत का नाम सामने आया, तो अब पुलिस उनके साथ भी जांच कर रही है. वन इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने चेन्नई के नुंगमबक्कम इलाके में, मायलापुर से एआईएडीएमके आईटी विंग के सदस्य प्रसाद को पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी अजय वंडेयर और कुख्यात बदमाश सुनामी सेतुपति के साथ एक निजी बार में कथित रूप से मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था.
जांच में जुटी पुलिस
इसके तुरंत बाद प्रसाद को और भी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जब उस पर कई लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगने के आरोप में शिकायतें दर्ज की गईं. उसके खिलाफ नुंगमबक्कम और मायलापुर पुलिस स्टेशनों में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए. प्रसाद पर ड्रग्स के सेवन के आरोप में भी जांच शुरू हुई. पुलिस इस मामले की सक्रिय रूप से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने ड्रग्स कहां से खरीदे और किन अन्य लोगों को ये ड्रग्स दिए गए.
श्रीकांत ने नहीं जारी किया बयान
श्रीकांत और उनकी टीम ने अभी तक ड्रग्स से जुड़े आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. पुलिस की जांच अब भी जारी है और मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट्स आने के बाद ही और जानकारी साझा की जाएगी. सूत्रों के अनुसार, यह फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के इस्तेमाल पर बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी मेडिकल और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे.