मैहर विधानसभा में टिकट वितरण से गूंज रहे हैं बगावत के सुर
नारायण त्रिपाठी , रामनिवास उरमलिया ने दिखाए तीखे तेवर
मैहर, विधानसभा चुनाव का मतदान 17 नवम्बर को होने जा रहा है जिसको लेकर राजनीतिक दलो की तैयारियां जोरों पर है । जिला बनाये जाने के बाद मैहर विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने अपने प्रत्याशियों मैदान में उतार दिया गया है । सबसे पहला नाम भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत चतुर्वेदी का है, कांग्रेस धर्मेश घई बहुजन से वीरेंद्र कुशवाहा , आप से वैद्यनाथ कुशवाहा, समाजवादी पार्टी चन्द्र प्रकाश पटेल को अपने प्रत्याशी बनाए हैं , वहीं विध्य जनता पार्टी से चार बार विधायक रह चुके नारायण त्रिपाठी पांचवीं बार विधायक बनने का मंसूबा लेकर मैहर की जनता जनार्दन बीच जाने का मन बना चुके पार्टी के प्रत्याशी घोषित होने बाद पार्टियों में बगावती स्वर लगे है ।
बताया जा रहा है कि सालों से चुनावी मैदान में उतरने के प्रत्याशियों ने तैयारी कर ली मगर पार्टी ने टिकट वितरण कर कई नेताओं के मंसूबों में पानी फेर दिया जिसके बाद नेताओं पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । इसके बाद पार्टी के प्रत्याशियों के द्वारा नाराज लोगों को मनाने का सिलसिला शुरू हो गया वही स्थानीय लोगों के द्वारा बताया जा रहा है कि सभी दलों के टिकट वितरण किये जाने पर भी प्रत्याशियों के चुनाव को लेकर उदासीनता देखी रही है ।
मैहर से 4 बार विधायक नारायण त्रिपाठी ने भी अपनी पार्टी से बीजेपी विंध्य विकाश पार्टी से चुनाव लड़ने मन बना रहे है जिनको लोकप्रियता का अन्दाजा इस से लगाया जा सकता है नारायण ने जिस दल से पर्चा भरा जनता ने दिल खोल कर मतदान किया तो वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत चतुर्वेदी है जो को मैहर की जनता के लोकप्रिय नेता माने जाते हैं जिनका काम सिर्फ लोगों की मदद करना है । श्री चतुर्वेदी 2018 में काग्रेस पार्टी से विधानसभा प्रत्याशी रह चुके है जिन्हें भाजपा पार्टी से नारायण त्रिपाठी ने काफी कम वोटो के अन्तराल से हराया था । श्रीकांत के द्वारा जनता के हित के कई काम किये गए हैं जिसमें निःशुल्क शव बाहन है , बाकी भाजपा सरकार की योजनाओं के नाम पर दम भर रहे है । वहीं कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी धर्मेश घई पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके है । नपा अध्यक्ष रहते हुए घई ने कोई विशेष उपलब्धि हासिल नहीं की लोकप्रियता में मैहर के किसी से पीछे नहीं है । साफ सुथरी वाले नेता माने जाते है । ग्रामीण अंचलों में घई को पकड़ कमजोर है मगर बिजनेस मैन घई को को रिझाने की कला आता है इनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण यह है कि ये जातिगत समीकरण से बाहर है । वहीं बहुजन पार्टी से प्रत्याशी बने बोरेन्द्र कुशवाहा विधानसभा चुनाव में पहले भी अपनी किस्मत आजमा चुके है मगर सफलता नहीं मिली इसके बाद भी निराशा छोड़कर एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं । इसके अलावा समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी चन्द्र प्रकाश पटेल छोटू अपने आप को गरीबों का मसीहा बताने वाले नेता है जो विधानसभा के चुनाव में पहली बार किस्मत आजमा रहे है । श्री छोटू लोगों की मदद के लिए हमेशा ही तत्पर रहते है जिसकी वजह से कई बार गैर कानूनी रास्ता आजमाने की वजह से जेल भी जाना पड़ा मगर ये उनके लिए कोई नई बात नहीं है।
पार्टी के फैसले के बाद गूंजे बगावती स्वर
कांग्रेस पार्टी के टिकट वितरण के दावेदारी करने वाले प्रत्याशी रामनिवास उमलिया ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को चैलेंज कर दिया है । उरमलिया के द्वारा टिकट न मिलने के बावजूद में शक्ति प्रदर्शन किया और पार्टी आलाकमान के खिलाफ बयानबाजी करते हुए टिकट को बदलने की मांग की है जिसे देखते हुए यह लग रहा है कि उरमलिया अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि इस लड़ाई में पार्टी कई और जमीनी नेता भी इस लड़ाई में उनके साथ खड़े नजर आए ।