CURATED BY – UMESH KUSHWAHA | CITYCHIEFNEWS

सतना, कहने के लिए जरुर हमारा सतना भी देश के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है, लेकिन यहां पर स्मार्ट जैसी कोई भी जन सुविधाएं आपको कभी गलती से भी नजर नहीं आएंगी। विंध्य क्षेत्र के सतना नगर निगम का जन्म हुए पच्चीस साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है और इसी बीच सतना को स्मार्ट सिटी की सौगात भी नसीब हो गई, अगर कुछ नहीं हुआ तो वह मूलभूत सुविधाओं का आम जनता तक विस्तार। स्मार्ट सिटी सतना की पहचान रिहायशी इलाकों की सड़कों पर होने वाले जलभराव से होती है। यहां पर विकास सीमा को पार कर गया है इसलिए जनता की समस्याएं केवल दिखावटी तौर पर अधिकारियों और नेताओं को नजर आती है। पिछले पच्चीस साल के दौरान जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर आम जनता के करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए लेकिन लोगों के दरवाजे तक सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। सतना नगर निगम के विकसित वार्ड की सूची में शुमार वार्ड नंबर 33 की कहानी भी शहर के दूसरे वार्ड की तरह बनी हुई है। यहां पर घर घर जल और सड़कों का जाल बिछाया गया लेकिन बरसाती पानी की निकासी के लिए अति आवश्यक नालियों का निर्माण कराने में जनप्रतिनिधि सफल नहीं हुए। यही वजह है कि सांईबाबा मंदिर के सामने मौजूद गली नंबर दो में बरसात होते ही अलग-अलग स्थानों पर जलभराव लोगों के लिए जटिल समस्या बन जाती है। इन पच्चीस साल में सांसद, विधायक, महापौर और नगर निगम के अधिकारियों ने विकास के लिए आने वाले सरकारी बजट में मलाई तो जमकर छानी लेकिन कोई व्यवस्थित शहर की परिकल्पना को लेकर गंभीर नजर नहीं आया। गलियों में सड़कों के दोनों तरफ बिना नाली निर्माण कराए जल निकासी की बात करना पूरी तरह बेमानी है। हमारे महापौर विकास को लेकर विदेशी धरती पर सम्मानित किए जाते हैं जबकि जमीनी हकीकत कोसों दूर है। यदि वाकई में नगर निगम क्षेत्र में बसी रिहायशी कालोनियों में जनता की समस्याएं सार्वजनिक हो जाएं तो सम्मान तो दूर हमारे जनप्रतिनिधियों को कोई आयोजन तक में शामिल होने के लिए नहीं बुलाए। विकास की लफ्फाजी का ढिंढोरा पीटने वाले नेताओं को धरातल पर उतर कर जनता के लिए काम करने की आवश्यकता है वरना आने वाले समय में परेशान जनता नेताओं के आगमन पर अपने घरों का दरवाजा तक नहीं खोलेगी।