समाधि स्थल पर हुए जैन महासतियों के प्रवचन
संप्रदायवाद से दूर रहकर की जानी चाहिए समाज की सेवा-महासती
CURATED BY – BHAGWAN DAS BERAGI | CITYCHIEFNEWS
शाजापुर, हिम्मतमल माणकचंद नारेलिया के बगीचे में स्थित श्रमण संघीय जैन महासती रतनकुंवर महाराज साहब की समाधि पर श्रमण संघीय महासती डॉक्टर आदर्श ज्योति, महासती डॉक्टर आत्म ज्योति, महासती डॉक्टर रजत ज्योति के सानिध्य में जैन समाज द्वारा महामंत्र नवकार के जाप का आयोजन किया गया। इस मौके पर दक्षिण ज्योति महासती, डॉक्टर आदर्श ज्योति महाराज साहब ने अपने प्रवचन में कहा कि महासती रतनकुंवरजी ने 9 वर्ष की बाल्यावस्था में अपने जीवन में जैन भगवती दीक्षा को ग्रहण किया। उनका पूरा जीवन जैन धर्म के भगवान महावीर के संदेश को जनजन तक पहुंचा कर अहिंसा पारमोधर्म जिओ और जीने दो एवं करुणा दया और मैत्री के संदेश को भारत में पैदल भ्रमण करके प्रचारित करते हुए बीता। उनका शाजापुर से विशेष संबंध था। शाजापुर में महासती वल्लभकुंवर एवं महासती पानकुंवर जी ने जैन भगवती दीक्षा ग्रहण की। शाजापुर स्थित कसेरा बाजार जैन स्थानक में 50 वर्षों से ताले नहीं लगे क्योंकि यहां पर आपकी 7 महासतियों ने वृद्धावस्था में निर्वाण गति को प्राप्त किया। शाजापुर संघ की सेवा भक्ति एवं समर्पण से आपके जीवन में संयम, साधना से प्रभावित होकर आचार्य सम्राट आनंद ऋषि महाराज साहब ने आचार्य पदवी के बाद पहला चातुर्मास शाजापुर को प्रदान किया। महासती ने कहा कि शाजापुर का एक गौरवशाली स्वर्णिम इतिहास है। वहीं महासती डॉक्टर आदर्श ज्योति ने कहा कि नगर में हिम्मतमल जैन की सेवा भक्ति एवं डॉक्टर सागरमल जैन की विधाता से जैन समाज शाजापुर की पहचान है। उन्होने कहा कि समाज को संप्रदायवाद से दूर रहकर समाज और संतों की सेवा में समर्पित होकर काम करना चाहिए। महासती ने कहा कि जीवन में विनम्रता, सज्जनता, दया और करुणा ही जीवन की आधारशिला है, यह जीवन के आभूषण हैं। उन्होने कहा कि शाजापुर के पूर्वजों के स्मरण के साथ उनका जीवन जैन धर्म के लिए ही नहीं मानो कल्याण के लिए समर्पित रहा है। ऐसी आत्माओं ने महासती रतनकुंवर जी की जो सेवा कि वह एक आदर्श है। शाजापुर को निरंतर महासतियों के चातुर्मास प्राप्त हुए यह शाजापुर संघ का गौरव है। कार्यक्रम की अध्यक्षता माणकचंद नारेलिया ने की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।