घोटाला, घोटाला, घोटाला
पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैंको मे हो गया करोडो का घोटाला ईओडब्ल्यू करे जांच
इंदौर, दरसल किसान विजय तिवारी पिता राम भरोसे तिवारी की जमीन ग्राम सिमरोल गाँव गौकन्या का सौदा खसरा नंबर इस प्रकार हैं 72, 190, 191, 110/1, 110/2 120/362, 124, 181/1, 183/1, 184/2, 185/2, 186/2,189 का कुख्यात अपराधी शदाब खान पिता रफीक खान ने जलसाजी से 420 कर धोखा धड़ी से नॉन आॅपरेटिव बैंक के चेक दे कर खुद के बनाए हुए जालसाज गिरहो के सदस्यों जिनके द्वारा पहले ही कई बैंको से जालसाजी और धोखेबाजीे कर ऐसी कई प्रॉपर्टी पर लोन ले कर आज तक अदा नहीं किया हैं वा बैंको मे भी डिफाल्टर हैं शदाब खान पेशेवर जलसाज हैं उसने अपने गिरोहा मे ऐसे सदस्यों को शामिल करता हैं जिनके पास अलग अलग नाम से कई जालसाजी के कागज उन सभी के पास मौजूद है जैसे आधार कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड ताकि कई बैंको से अच्छा मोटा पैसा लोन के रूप लिया जा सके इसी तरहा अपने पूरे गिरोहो मे ऐसे 8 सदस्यों को शामिल किया हुआ है के उनके नाम सुमित प्रकाश पाटनी पिता मणिक चन्द पाटनी, अरुणा पाटनी पति सुमित प्रकाश पाटनी,अनिल कुमार पंवार पिता मोहन सिंह पंवार, राहुल जैन पिता राकेश जैन, आनंद कसेरा पिता लक्ष्मणदास कसेरा राकेश जैन पिता स्व.नवीन चन्द जैन,पार्वती जैन पति बक्षीराम जैन, पवन जैन पिता बक्षीराम जैन इन जलसाजो के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली तत्पश्चात, ऐसे बैंको को ढुडा जाता हैं जहाँ अपनी जुगाड़ का बैंक हो ओर वहाँ से करोडो रूपए का लोन ले लिए जा सके और हुआ भी वही की जैसे तैसे उन बैंको की शाखाओ से लोन करा लिया गया। कृषि भूमियाँ जिनका नमन्तरण आज तक भी नहीं हुआ है पर फिर भी उन पर एक दो करोड़ों का लोन नहीं कई सौ करोड़ का लोन एवं कृषि भूमियो पर प्लाट दिखा कर भी लोन लिया गया हैं और इन्ही लोनो को ले कर शादाब खान एंड गिरहो चंपात हो गया हैं इस गिरोह मे कई बैंको के अधिकारी, चेर्टेड अकाउंटेट, बैंक से सेटिंग कर प्रॉपर्टी सर्वायर कम मूल्य की जगह ज्यदा की सर्र्वे रिपोर्ट दे कर लोन ले लेते है इस गिरोह की नजर उन जमीन दुकान मकान प्लाटो पर रहती हैं जिनके मालिक कई सालो से अपनी प्रॉपटीर्यो पर गए ही नहीं या फिर उन्हें मालूम ही नहीं पडता हैं और उन पर बैंको से लोन हो जाता हैं इनमे बैंको की भूमिका संदयस्पद हैं जो ऐसी प्रॉपर्टी पर बिना जाँच पडताल के लोन दे देती हैं। ईडी डिपार्टमेंट (प्रवर्तन निदेशालय) व ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) के द्वारा ऐसी बैंको और उनके द्वारा पूर्व में दिए गए लोनो पर तुरंत जांच कर करवाई हो।
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