सतना स्मार्ट सिटी बनी मौत की सिटी
सतना के मुख्य मार्ग रेलवे स्टेशन से सिटी कोतवाली तक खाई में तब्दील
सतना जिले को मा सिटी बनाकर शासन के अरबो रुपए की योजना कागज में कैद हो चुकी है स्मार्ट सिटी के नाम से आने वाली राशि को जिले के अधिकारी हुआ राजनेता स्मार्ट सिटी के नाम पर मौत की सिटी बन चुके हैं इन्हें ना तो सतना की सुंदरता से मतलब है और ना ही सपना के आम जनता से इन्हें केवल कहां से कितनी राशि डकार जाएं दिन रात उनके विचार में बना रहता है रेलवे स्टेशन से कोतवाली सड़क बनी मौत की खाई गत दो माह से रोड में नलजल योजना के तहत बीच के सड़क पर खाई खोदी गई है और उसमें कहीं तो पाइप डालकर या कहीं खाई खोदकर छोड़ दिया गया है इसी रास्ते से जिले व संभाग के सक्षम अधिकारी व तथा कथित नेता अपने लग्जरी गाड़ियों पर चल रहे हैं लेकिन उनके नज़रों में यह मौत की खाई नोटों के गाड़ी की पट्टी बांधे होने के कारण दिखाई नहीं दे रही है औरआए दिन आम जनता इस खाई में गिरती है व अस्पताल पहुंच जाती है लेकिन इन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है।
आखिर कौन है जिम्मेदार
सतना शहर को सौंदरीकरण या कभी स्मार्ट सिटी के नाम पर पूरे शहर को जव सी मशीन लगाकर कोड दिया जाता है और ठेकेदार से लेकर नेता व अधिकारी कुंभकरण की नींद में सो जाते हैं जिसके चलते आम जनता आए दिन इस शहर के खुले हुए नाली में गिरती है और वहां से अस्पताल पहुंच जाती है लेकिन ना तो ठेकेदार हुआ ना किसी अधिकारी पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं होती है तब जनता की एक ही आवाज होती है आखिर इस शहर के दुर्दशा का कौन है जिम्मेदार?
कब जनता को मिलेगी स्मार्ट सिटी की सुविधा कागजों में तो पिछले तीन वर्षों से सपना शहर को स्मार्ट सिटी के नाम से जाना जा रहा है किंतु सच तो यह है कि आज भी सतना शहर कि स्थिति बद से से बदतर है और उसका खामियाजा सतना शहर व ग्रामीण की आम जनता रही है अभी तक सतना शहर की धूल तक तो शहर से हटी नहीं जबकि जिले से लेकर प्रदेश व केंद्र तक सतना सिटी को स्मार्ट सिटी के नाम से पहचाना जा रहा है सच बात तो यह है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जिले के सक्षम अधिकारी व सक्षम राजनेता एवं सिर्फ कागजों पर ही सतना स्मार्ट सिटी में दिखाई दे रहा है।आम जनता के बीच अभी भी एक ही प्रसन हैँ कि कब मिलेगी स्मार्ट सिटी कि सुबिधा।
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