शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों पर फिर बरसे संजय राउत
बोले- ‘बाजार में खुद को बेचने के लिए खड़े थे’
मुंबई, अपनी स्थापना के 60वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) एक बार फिर गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। चार वर्ष पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के लोकसभा सांसदों में भी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के नौ निर्वाचित सांसदों में से छह के पाला बदलने की चर्चाएं तेज हैं। इस घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत लगातार बागी सांसदों पर हमलावर बने हुए हैं।
शुक्रवार को भी राउत ने बागी सांसदों पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी राजनीतिक निष्ठा को सौदेबाजी का माध्यम बना लिया है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का विभाजन नहीं, बल्कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त का मामला है।
‘यह बंटवारा नहीं, सौदेबाजी है’
संजय राउत ने कहा कि किसी विचारधारा से जुड़े व्यक्ति के पार्टी छोड़ने को विभाजन कहा जा सकता है, लेकिन जब कोई स्वयं को बेचने के लिए बाजार में खड़ा हो और कोई उसे खरीद ले, तो उसे केवल सौदेबाजी कहा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के छह सांसदों ने दो दिन पहले अपनी कीमत तय की और राजनीतिक लाभ के लिए दूसरी ओर चले गए।
राउत ने कहा कि इन नेताओं ने किसी वैचारिक मतभेद या राजनीतिक सिद्धांत के कारण पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दी है।
छह सांसदों पर साधा निशाना
राउत ने बागी सांसदों—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर—का नाम लेते हुए उन पर पार्टी अनुशासन तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के सख्त ‘थ्री-लाइन व्हिप’ के बावजूद इन सांसदों ने दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण संसदीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
मंत्री पद को लेकर विवाद का लगाया आरोप
संजय राउत ने दावा किया कि सांसदों के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। उनके अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ गई कि देर रात समझौते के जरिए मामला शांत करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि असंतुष्ट सांसदों को मनाने के लिए वित्तीय आश्वासन दिए गए। राउत ने दावा किया कि अगले एक वर्ष के भीतर प्रत्येक सांसद को अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने का वादा किया गया है, ताकि वे सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त न करें। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
‘भारी सुरक्षा में छिपे हुए हैं सांसद’
राउत ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित सांसद फिलहाल कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच अज्ञात स्थानों पर ठहरे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्होंने कोई गलत कार्य नहीं किया है तो उन्हें इतनी बड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन गृह विभाग का ध्यान कथित रूप से ‘गद्दारों’ की सुरक्षा पर केंद्रित है।
भाजपा पर भी साधा निशाना
अपने बयान के दौरान संजय राउत ने भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि सांसदों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण शिवसेना (यूबीटी) छोड़ी है।
राउत ने कहा कि जिन सांसदों ने हाल ही में चुनाव जीता, उन्हें महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग मिला था। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव के समय कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी, तब किसी को आपत्ति नहीं थी, लेकिन अब अचानक कांग्रेस विरोध का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना (यूबीटी) के भीतर बढ़ता असंतोष आगामी दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
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