CURATED BY – MOHMMAD MUNEER | CITYCHIEFNEWS

शहडोल, जिले में नासूर बना माफ़ियाराज के चलते एक तरफ जहां मध्यप्रदेश के करोडो रूपए के शासकीय खनिज राजस्व की क्षति पहुंच रही है वही रेत टेका कंपनी भी कही न कही रेत माफियाओ के दबाव में काम करने मजबूर है, नाम ना छापने की शर्त पर खनिज कारोबारी का कहना है की शहडोल में नेता मंत्री ही माफिया को बढ़ावा देने का काम करते है, तभी तो बंगाल, दिल्ली और शहडोल छोड़कर हर जगह हुआ बलात्कार, मर्डर, के लिए शहडोल में लंबी लम्बी कतारे हाँथ में मोमबत्ती लेकर कलेक्ट्रेट से गाँधी चौक में जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे बुलंद  करते नज़र आते है लेकिन शहडोल आज नेतृत्व विहीन इलाका है जिसके चलते पटवारी के बेबस परिवार को शहडोल में नेता मंत्री का कोई सहारा नहीं मिला, इतना ही नहीं पटवारी की हत्या के बाद देवलोंद और ब्यौहारी की कमान थामे एसडीओपी तक नहीं बदला गया, वायरल ऑडियो के बाद संबंधितो को रत्ती भर जाँच की आंच नहीं आई। और प्रशासन उस इलाके से अवैध खनन को रोकने की बात करता है लेकिन बदमाशों का आतंक पुलिसिया तंत्र पर हावी है। ऐसा नहीं है कि शहडोल में पहले माफियाओ ने सर नहीं उठाया। लेकिन जब भी नागरिको की सुरक्षा पर बन आयी है तो पुलिसिया तंत्र ने हर उस माफिया के फ़न कुचला है जिसने भी कानून का मज़ाक बांया लेकिन बीते एक वर्षो में जिले की कानून व्यवस्था माफियाओ पर कार्यवाही का माद्दा जुटा नहीं पा रही है।  

कई वाहनों में सवार होकर पहुंचे हमलावर
पुलिस ने बताया सुखाड़ रेत चेक पोस्ट पर रात करीब 12 बजे तीन चार वाहनों में सवार होकर करीब 30-35 हमलावर पहुंचे और लाठी डंडे से मारपीट करने लगे। इस दौरान रेत ठेका कंपनी के कर्मचारी व हमलावर दोनों के बीच मारपीट हुई। जिसमें महेन्द्र सिंह 29 वर्ष, जितेन्द्र सिंह 36 वर्ष, रावेन्द्र तिवारी 45 वर्ष, सचिन सिंह 38 वर्ष व जितेन्द्र सिंह 35 वर्ष को गंभीर चोट आई है। जिनका उपचार मेडिकल कॉलेज में जारी है। घटना की जानकारी लगते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर विवेचना में जुट गई है। कर्मचारियों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने फायरिंग भी की और नकदी 5 हजार लूट ले गए।

माफिया के खिलाफ खोला मोर्चा
माफिया के खिलाफ बोलना इस जिले में अपराध है इसका जीता जगता उदहारण थानों में माफियाओ के खिलाफ दम तोड़ती शिकायते है जिसके चलते ही कभी न कहीं बल मिलता है और फरियादी माफिया के बाहुबल का शिकार होता है, शहर में ऐसे कई उदाहरण है जिसमे अन्याय हुआ खुली आँखों से सबने देखा और फरयादी के मौत के बाद अथवा किसी अप्रिय घटना के बाद जागती पुलिस मर्ग कायम करने में रूचि रखती है, माफियाओ के खिलाफ लगातार गोगपा से पुरुषोत्तम सिंह मरावी के नेतृत्व में रेत माफियाओ के विरुद्ध आवाज़ उठाई, लेकिन माफिया और प्रशासनिक गठजोड़ के चलते आवाज़ दबाने तरह तरह के षड्यंत्र रचे गए।

पटवारी की मौत बेबस परिजन
गौरतलब हो की शहडोल में एएसआई से पहले रेत माफियाओं ने एक पटवारी की हत्या कर दी थी। परिवार को आज तक न्याय नहीं मिला है। पटवारी की पत्नी गुंजा सिंह का दर्द तत्कालीन महिला कलेक्टर भी नहीं समझ पाई, अब थक हार कर हाई कोर्ट की दहलीज में कलेक्टर के उस मौखिक आदेश की बात जोह रही है जिसके चलते अनुकम्पा नियुक्ति आर्थिक मदद में बाधा आ रही है, शर्म की बात की राजा विराट की विराट नगरी शहडोल में उनकी मदद की महज पच्चीस हजार रूपए की आर्थिक सहायता मिली जिसको मृतक पटवारी की पत्नी गुंजा सिंह ने शहडोल कलेक्टर के चेंबर में लौटा दिया था।

भूमाफिया पर मेहरबानी
शहडोल में दो पत्रकारों की जान का जोखिम है घर के सामने 15 - 20 हथियार बंद लोगो ने कालोनी में घुसकर पत्रकार की हत्या करने की नियत से चलती कार में रॉड स्टील पाइप इत्यादि से हमला किया कांच तोडा वारदात में सीसीटीवी सबूत सौपे गए लेकिन पुलिस बदमाशों से जिसने भेजा था व्हाट्सअप काल में फोटो देखते हुए जिन्दा मत छोड़ना कहा, उनके आकाओं का नाम पूछने में फेल हो गई, इतना ही नहीं पुलिस को आठ महीने मिले और माफियाओ को भी मौका मिला इस बीच पुलिस ने तो हाँथ खड़े कार दिए l कार्यवाही के नाम पर महज खाना पूर्ति की, लेकिन भूमाफिया पर खबर करना पत्रकार को इतना महंगा पड़ा की आये दिन जान से मरने की कोशिश कार रहा है, हालही ही में कोतवाली थाना के लगभग 100 मीटर में है पत्रकार की कार के ठीक सामने लाल रंग की थार लगाकर रोक लिया उसमें बैठे बेख़ौफ़ भूमाफिया अभिषेक मिश्रा एवं रिश्वतखोरी में ट्रेप हुआ शुभम श्रीवास्तव ने जान से मरने को राइफल निकली उस दिन भबि बामुश्किल जान बचाकर कोतवाली की शरण ली वहा ड्यूटी में पदस्थ कामता पयासी ने पूरी वारदात को सुनने के बाद हथियार सहित रंगे हाँथ माफियाओ को गिरफ्तार करने की बजाए 3 घंटे से ज्यादा का समय उनको दे दिया। पत्रकार की शिकायत पर एफआईआर तक नहीं लिख। आश्चर्य इस बात का है की कोतवाली पुलिस आज तक लंबित कार्यवाही माफियाओ के इशारे पर होल्ड कार राखी गई है जबकि घटनाक्रम के मौका स्थल में आधादर्जन घरो में लगे सीसीटीवी कैमरे में वारदात कैद है लेकिन पुलिस पत्रकार के साथ लगातार हो रही घटनाक्रम की अनदेखी कर रही है।

यहाँ सक्रीय रेत माफिया
सोन घडिय़ाल क्षेत्र में लंबे समय से रेत का अवैध खनन चल रहा है। प्रतिबंध के पहले ब्यौहारी व देवालोंद थाना क्षेत्र के सुखाड़, बोड्डिहा, मसीरा, गोपालपुर के कई स्थानों में रेत का अवैध भंडार कारोबारियों ने कर रखा है। जिसे अब आसपास के क्षेत्रों में महंगे दामोंं में खपा रहे हैं। रेत के भंडारण में कार्रवाई कर जब्त भी की गई थी। लेकिन आश्चर्य की बात यह भी है किअवैध रेत की जब्ती के बाद विभाग ने उन्हीं को सौंपा था। गौरतलब हो की पूर्व तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश जारी किया था। जिसमें साफ लिखा था कि नाका पर स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन द्वारा अपने पर्यवेक्षण नियंत्रण व निर्देशन में किया जाएगा। पारदर्शिता के लिए सभी तरह से नियंत्रण प्रभारी अधिकारी स्टेट माइनिंग के स्तर पर किया जाएगा। लेकिन यहाँ भी कायदे कानून की अनदेखी हुई।
लगातार चोरी और खप रहा ड्रग्स
जिले में बीते वर्ष एक चोरी जिसमे बंधक बनकर एक परिवार की गाढ़ी कमाई लूट ली गई थी, एमपीईबी कर्मचारी के घर, कल्याणपुर में चोर सीसीटीवी में कैद चोर पुलिस की फाइल में धूल फांक रहे है आज तक उनके गिरिबान तक पुलिस का न पहुंच पाना भी प्रशासनिक फैलियर है, उधर एक आंगनबाड़ी में देर रात ड्रग्स की खेप डंप होती है बीत प्रभारी को साफ़ तौर पर सब जानकारी है, कोतवाली में पदस्थ बीट प्रभारी की मुख्य भूमिका पर सवाल है पुरानी बस्ती और कल्याणपुर के बीच ड्रग्स का काला कारोबार में वो सभी ट्रेप हो सकते है जो चोरी की वारदात में सीसीटीवी में कैद है, लेकिन पुलिस जब सरगर्मी से तलाश करना शुरू करे तब लेकिन माना जा रहा है यहाँ भी पुलिस बड़े दबाव में काम करती है हालही में एक किसान के घर माफिया में गांजा रखवाया, फिर पुलिस ने शराब का केस बनाया और उल्टा गांजा का केश राजा नामक पर बनाना पड़ा यह मामले में पुलिस की सोशल मीडिया में अच्छी खशी किरकरी हुए थी।
अब तो मामले में नागरिको का कहना यह है की शहर की कानून ब्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो शहर की जनता को सड़को में उतरना पड़ेगा।  और अब तक मामला जो भी रहा हो शहडोल में माफिया का माद्दा खूनी खेल खेलने का तो नहीं रहा जो अब ट्रेंड चल पड़ा है स्थिति भयवाह होगी।