आज देशभर में मेडिकल दुकानों की हड़ताल ने स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा बाजार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह हड़ताल केवल व्यापारिक विरोध नहीं बल्कि देश में तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन दवा बिक्री, ई-फार्मेसी और कॉर्पोरेट मेडिकल चेन के खिलाफ बड़ा आंदोलन बन चुकी है। इस बंद का असर छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक दिखाई दिया। लाखों मेडिकल दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और सरकार से सख्त नियम बनाने की मांग की देश की सबसे बड़ी केमिस्ट संस्था All India Organisation of Chemists and Druggists ने यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई संगठन का दावा है कि देशभर के करीब 12.4 लाख मेडिकल स्टोर व केमिस्ट और दवा वितरक इस आंदोलन से जुड़े हैं मेडिकल दुकानदारों का कहना है कि
ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियां बिना पर्याप्त निगरानी के दवाएं बेच रही हैं कई प्लेटफॉर्म बिना वैध डॉक्टर पर्चे के एंटीबायोटिक, नशीली और संवेदनशील दवाएं दे रहे हैं।
भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार खत्म किया जा रहा है। कोविड काल में बनाए गए अस्थायी नियमों का दुरुपयोग अब भी जारी है। ई-फार्मेसी कंपनियां दवा कानूनों के कई प्रावधानों से बच निकलती हैं। आखिर कार कौन से नियमों का विरोध हो रहा है यह विरोध खास तौर पर GSR 817(E) और GSR 220(E) जैसे सरकारी नोटिफिकेशन के खिलाफ है। मेडिकल दुकानदारों का आरोप है कि इन नियमों ने ऑनलाइन दवा बिक्री और होम डिलीवरी को बढ़ावा दिया, जिससे पारंपरिक मेडिकल दुकानों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया दुकानदारों का कहना है कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है। यदि गलत दवा या गलत मात्रा में दवा मरीज तक पहुंची तो जान को खतरा हो सकता है। इसलिए दवा वितरण पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। इस आंदोलन के पीछे कई बड़े उद्देश्य बताए जा रहे हैं
 छोटे मेडिकल दुकानदारों को बचाना छोटे केमिस्टों का कहना है कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा करना चाहती हैं। इससे मोहल्लों की पारंपरिक मेडिकल दुकानें बंद हो सकती हैं दुकानदारों का दावा है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फर्जी या AI से बनाए गए प्रिस्क्रिप्शन पर भी दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे गलत दवा सेवन का खतरा बढ़ रहा है। ऑफलाइन मेडिकल दुकानों को लाइसेंस, फार्मासिस्ट, रिकॉर्ड और निरीक्षण जैसे कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। दुकानदार चाहते हैं कि ऑनलाइन कंपनियों पर भी वही नियम लागू हों मेडिकल व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि अभी रोक नहीं लगी तो कुछ बड़ी कंपनियां पूरे दवा बाजार पर नियंत्रण कर लेंगी। पूरे देश में क्या असर पड़ा इस हड़ताल का असर कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में मेडिकल दुकानें बंद रहीं वहीं रोजाना दवा लेने वाले मरीज परेशान हुए ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट मरीजों को कठिनाई हुई ग्रामीण इलाकों में दवा उपलब्धता प्रभावित हुई
कई लोगों को अस्पतालों की फार्मेसी पर निर्भर रहना पड़ा। 
हालांकि सरकार और प्रशासन ने कई जगह वैकल्पिक व्यवस्था भी की।  सरकार ने क्या कदम उठाए केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली Central Drugs Standard Control Organisation यानी CDSCO ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए कि दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। सरकार ने अस्पतालों की मेडिकल दुकानों को खुला रखने के निर्देश दिए जन औषधि केंद्र चालू रखने को कहा।
कई राज्यों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए ड्रग इंस्पेक्टरों को निगरानी पर लगाया गया राज्यों की सरकारों का क्या रुख रहा
कई राज्य सरकारों ने साफ कहा कि आम जनता को दवा की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।वहीं सरकारों ने अपने अपने राज्यों मे इमरजेंसी व्यवस्था सम्हालने कों लेकर प्रशासन कों जिम्मेदारी दी महाराष्ट्र FDA ने इमरजेंसी हेल्पलाइन जारी की और अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रखने को कहा
तमिलनाडु सरकार ने 5000 से ज्यादा अस्पताल-आधारित फार्मेसी चालू रखने का दावा किया। मध्य प्रदेश में करीब 41 हजार मेडिकल स्टोर बंद रहने की खबर सामने आई। भोपाल में भी बड़ा असर देखा गया। कुछ मेडिकल फार्मेसी हड़ताल में शामिल नहीं हुए राज्य स्तरीय फार्मेसी संगठनों और बड़ी मेडिकल चेन ने इस हड़ताल से दूरी बनाई। कई बड़े फार्मेसी नेटवर्क, अस्पताल फार्मेसी और जन औषधि केंद्र खुले रहे। देखा जाये तो दुकानदारों को तभी फायदा मिल सकता है यदि सरकार उनकी मांगें मान लेती है तो ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं भारी डिस्काउंट की नीति सीमित हो सकती है छोटे मेडिकल दुकानदारों का व्यापार सुरक्षित रह सकता है दवा बाजार में बड़ी कंपनियों का एकाधिकार कम हो सकता है ऑफलाइन मेडिकल दुकानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ सकती है। पर सरकार फिलहाल संतुलित रुख अपनाती दिख रही है। एक तरफ सरकार डिजिटल हेल्थ और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा देना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ वह दवा सुरक्षा और आम जनता की सुविधा को लेकर भी सतर्क है। सरकारी सूत्रों के अनुसार ई-फार्मेसी नियमों की समीक्षा की जा रही है केमिस्ट संगठनों से बातचीत जारी है दवा आपूर्ति बाधित नहीं होने देने पर जोर है। आगे यह हड़ताल आने वाले समय में देश की दवा नीति और ऑनलाइन मेडिकल कारोबार पर बड़ा असर डाल सकती है। यदि सरकार और केमिस्ट संगठनों के बीच समझौता नहीं हुआ तो भविष्य में और बड़े आंदोलन हो सकते हैं। दूसरी ओर सरकार संभवतः ई-फार्मेसी के लिए नया कानून या सख्त रेगुलेशन ला सकती है, जिससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्था के बीच संतुलन बनाया जा सके।