सेंट लुइस। भारत के युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने अमेरिका में आयोजित 'सेंट लुइस रैपिड एंड ब्लिट्ज' टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रज्ञानानंदा शुरुआत से ही शीर्ष पर बने रहे। ब्लिट्ज चरण के आखिरी से एक मुकाबले में उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ ड्रॉ खेलते ही उन्होंने खिताब पक्का कर लिया।

प्रज्ञानानंदा ने कुल 35 में से 23.5 अंक हासिल किए, जो टूर्नामेंट में सर्वाधिक रहे। यह उनके करियर की पहली ग्रैंड चेस टूर (GCT) ट्रॉफी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्हें करीब 48 लाख रुपये यानी 50 हजार डॉलर की पुरस्कार राशि और 13 महत्वपूर्ण GCT अंक भी मिले।

पांच दिनों तक कायम रखा दबदबा

पांच दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा लगातार पहले स्थान पर बने रहे। हालांकि, उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव ने आखिरी दिन तक भारतीय खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने अपनी बढ़त कायम रखी।

ब्लिट्ज चरण के आखिरी नौ मुकाबलों में उन्होंने तीन जीत दर्ज कीं, पांच मुकाबले ड्रॉ खेले और सिर्फ एक मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह रही कि उन्होंने रैपिड और ब्लिट्ज दोनों चरणों में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए।

खिताब जीतने के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि स्कोरबोर्ड देखने पर यह जीत भले ही आसान नजर आती हो, लेकिन वास्तव में मुकाबला काफी मुश्किल था। उन्होंने माना कि सिंदारोव ने आखिरी समय तक उन्हें कड़ी चुनौती दी।

नॉर्वे चेस के बाद एक और बड़ी उपलब्धि

प्रज्ञानानंदा के लिए 2026 शानदार साल साबित हो रहा है। इससे पहले जून में उन्होंने ओस्लो में आयोजित नॉर्वे चेस का खिताब भी अपने नाम किया था। टूर्नामेंट के आखिरी दौर में उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया था और लगातार चार जीत के साथ चैंपियन बने थे।

अब उनकी नजरें सिंकफील्ड कप पर हैं, जो 10 अगस्त से शुरू होने वाला है। ग्रैंड चेस टूर के फाइनल में जगह बनाने के लिहाज से यह टूर्नामेंट बेहद अहम है। सिंकफील्ड कप के बाद अंक तालिका के शीर्ष चार खिलाड़ियों को GCT फाइनल में खेलने का मौका मिलेगा। फाइनल के विजेता को करीब 1.65 करोड़ रुपये यानी 2 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी।

12 साल की उम्र में हासिल किया था ग्रैंडमास्टर का खिताब

10 अगस्त 2005 को चेन्नई में जन्मे आर प्रज्ञानानंदा ने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय शतरंज में अपनी पहचान बना ली थी। साल 2018 में महज 12 साल, 10 महीने और 13 दिन की उम्र में उन्होंने ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था। उस समय वह दुनिया के दूसरे और भारत के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने थे।

प्रज्ञानानंदा के परिवार में शतरंज का खास जुड़ाव है। उनकी बड़ी बहन आर वैशाली भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध ग्रैंडमास्टर हैं और भारत का प्रतिनिधित्व कर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं।

सेंट लुइस में मिली इस जीत ने प्रज्ञानानंदा को न केवल पहली GCT ट्रॉफी दिलाई है, बल्कि 2026 में उनके शानदार प्रदर्शन को भी एक और बड़ी उपलब्धि के साथ मजबूत कर दिया है।