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सहारनपुर | देवबंद, श्री गीता प्रचार समिति सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री गीता भवन में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में पूज्य सन्त प्रियादास जी महाराज ने लंका दहन की कथा का वर्णन किया।
श्रीराwम कथा में लंका दहन का वर्णन करते हुए प्रियादास जी महाराज ने कहा कि अशोक वाटिका से रावण के दरबार में मेघनाथ महाबली को बांधकर ले जाता है। महाबली हनुमान जी रावण को सदुपदेश देकर समझाने का प्रयास करते है कि श्रीराम त्रिभुवन पति है उनसे बैर न करें, माता सीता श्रीराम को सौंप दे। महाबली ने कहा अरे तू किस कारण इतना गर्व से भर रहा है तू तो विनाश को प्राप्त होने वाला है क्योकि तेरे राज्य में न चरित्रशाला है, न विचारशाला है, न विज्ञानशाला है। रावण जिस राजा के राज्य में इन तीनो में से एक का भी अभाव हो जाता है वह राज्य कष्ट से घिर जाता है। रावण ने कहा अरे क्या तुझे पता नहीं है कि मेरा भाई कुम्भकर्ण कितना बडा विज्ञानी है। महाबली बजरंगी ने कहा तुम कुम्भकर्ण को बुलाओ मेरे प्रश्न है यदि उसने उत्तर दे दिया तो हम समझ लेगे सब ठीक है। महाबली ने दरबार में प्रश्न किये नक्षत्र मण्डल मे जो दूरी बनी हुई है आपस में नही मिल पाते यह शक्ति का चमत्कार है तथा पिण्ड प्रलय किस प्रकार होता है और वह कौन सी शक्ति है जो आखिल ब्रहमांड को गति मान किये है। रावण मूक हो उठता है कहता है मैं व मेरा भाई नहीं जानता है रावण खिसिया कर मंत्रियों कहता है कि इसकी पूंछ मे आग लगा दो, पूंछ हीन वानर जब जायेगा तब मेरे बल पराक्रम को इसका स्वामी स्वंय जान लेगा। श्रीराम कथा का पूूजन विधि-विधान से आचार्य विनय प्रकाश त्रिवारी ने किया। संचालन सुधीर गर्ग ने किया। यजमान अजय गांधी, श्रीमती सुधा गांधी सभासद रहे। प्रसाद वितरण नितिन गर्ग ने किया। इस अवसर पर अनुज गर्ग, बलराम माहेश्वरी, सुशील कर्णवाल, अजय बंसल, पंकज गोयल, संजय मित्तल, अखिल अग्रवाल, राजकुमार जाटव, छत्रपाल शर्मा, सोमनाथ गुप्ता, श्रीमती कान्ता त्यागी, श्रीमती मीरा देवी, मधु शर्मा, मंजू शर्मा, विमला देवी, सुदेश शर्मा आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।