वारंगल MGM अस्पताल में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, जमीन पर इलाज को मजबूर मरीज
न बेड, न सलाइन स्टैंड, न पंखे: MGM अस्पताल की अव्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
वारंगल, वारंगल MGM हॉस्पिटल में बुनियादी सुविधाओं का अकाल, मरीजों का बुरा हाल वारंगल, तेलंगाना:वारंगल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। यहां इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल के अंदर की तस्वीरें बेहद दर्दनाक और शर्मनाक हैं।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल में बेड की भारी कमी है। गंभीर हालत में आए मरीज जमीन पर चादर बिछाकर लेटने को मजबूर हैं। अस्पताल में सलाइन स्टैंड तक नहीं हैं, जिसकी वजह से दीवारों पर कील ठोककर सलाइन की बोतलें लटकाई जा रही हैं।सबसे दिल दहला देने वाला दृश्य यह है कि एक महिला अपनी सलाइन की बोतल खुद अपने हाथ में लेकर अपने छोटे बच्चे के साथ पूरे वार्ड में भटक रही है। न कोई डॉक्टर देखने वाला है, न कोई नर्स सहारा देने वाली।
भीषण गर्मी में वार्ड के पंखे भी बंद पड़े हैं। मरीजों के रिश्तेदार अपने घरों से टेबल फैन और हाथ पंखे ला रहे हैं। कुछ लोग तो अपने पंखों को अस्पताल में ही चार्ज करते नजर आए।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार सरकारी अस्पतालों के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। एमजीएम हॉस्पिटल में डॉक्टर तो हैं, लेकिन संसाधन नहीं हैं।मरीजों के परिजनों ने बताया कि उन्हें बाहर से दवाइयां और सलाइन तक खरीद कर लानी पड़ रही है। अस्पताल का स्टाफ भी कम है, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।इस अव्यवस्था के कारण गरीब जनता में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि वे तुरंत एमजीएम हॉस्पिटल का दौरा करें और यहां बुनियादी सुविधाएं बहाल करें।क्या यही है तेलंगाना का स्वास्थ्य मॉडल? जहां एक मां को अपनी सलाइन की बोतल खुद पकड़नी पड़े? यह सवाल आज हर वारंगल वासी पूछ रहा है।
देश
दुनिया
मनोरंजन
खेल
छत्तीसगढ
हरियाणा
दिल्ली
धार्मिक
व्यापार
टेक & ऑटो
शिक्षा
स्वास्थ्य
आंध्र प्रदेश
तेलंगाना
सिक्किम
ओड़िशा
झारखंड
असम
नागालैण्ड