धार, संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखाकर एवं संग्रहालय मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा 19 से 25 नवंबर तक विश्व धरोहर सप्ताह मनाया जा रहा है। विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत 21 नवंबर मंगलवार को धार के प्राचीन किला परिसर स्थित संग्रहालय में भीमबेटका के शैल चित्रों पर आधारित छाया चित्र प्रदर्शनी का प्रदर्शन किया गया। इसमें अनेक चित्रों का संग्राहलय की वीथिका में प्रदर्शन किया गया।
महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं से लेकर स्कूली बच्चों व पर्यटकों ने इस छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मंगलवार को छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ शासकीय महाविद्यालय धार के चित्रकला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ साधना सिंह ने किया। इस मौके पर विशेष रूप से भोज शोध संस्थान के निदेशक डॉक्टर दीपेंद्र शर्मा व  शासकीय ललित कला महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कांति तिर्की भी मौजूद रही। अतिथियों का स्वागत जिला पुरातत्व संग्रहालय, पुरातत्व विभाग के सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ डीपी पांडे ने किया। साथ ही प्रदर्शनी के उद्देश्य और भीमबेटका की धरोहर पर बच्चों को विभिन्न जानकारियां प्रदान की।

भीमबेटका के शैल चित्रों के बारे में

भीम बेटका की गुफाएं  मध्‍य प्रदेश राज्‍य की राजधानी भोपाल से लगभग 45 कि.मी. उत्‍तर-पूर्व में स्‍थित हैं। ये गुफाएं रायसेन जिले में भियापुर गांव के निकट स्‍थित हैं। विश्व के प्राचीनतम शैल चित्रों युक्त शैलाश्रयों से भरी हुई है। प्राचीन विंध्‍याचल पर्वतमाला के उत्‍तरी किनारे पर उत्कृष्ट शैलाश्रयों और चित्रों का स्‍थल है।  घने जंगलों में अत्यधिक हरियाली, चट्टानी भूभागों और पथरीली चोटियों के बीच छिपी तथा प्राचीन परिसरों की रक्षा करती ऊंची चट्टानों के बीच स्‍थित भीमबेटका की गुफाएं खास महत्व रखती है। भीमबेटका गुफाओं की खोज सन 1957-58 में हुई। विक्रम विश्‍वविद्यालय उज्‍जैन के एक महान पुरातत्‍ववेता डाॅ विष्‍णु श्रीधर वाकणकर जी ने इस स्थल की खोज की।