नई दिल्ली, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी अब आम लोगों की चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। आज फिर पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। मई महीने में यह तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे साफ माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है दरअसल पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया के तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर डर बढ़ गया है जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है इसलिए जैसे ही वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है उसका सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखाई देता है 
इसी बीच डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होता जा रहा है। कमजोर रुपया भारत के लिए तेल आयात को और महंगा बना देता हैँ यही वजह है कि तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है और धीरे-धीरे उसका भार आम जनता पर डाला जा रहा है। कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच चुका है जबकि डीजल भी तेजी से महंगा हो रहा है इस बढ़ती महंगाई का असर केवल वाहनों के ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा जिससे सब्जियां, दूध, राशन, फल, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें महंगी हो सकती हैं। किसानों की लागत भी बढ़ेगी क्योंकि खेती में डीजल का उपयोग सबसे ज्यादा होता है ट्रक किराया बढ़ने से बाजार में सामान की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं आने वाले दिनों में महंगाई दर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है केंद्र सरकार तेल कंपनियों के साथ लगातार बैठकें कर रही है और जरूरत पड़ने पर एक्साइज ड्यूटी में राहत देने पर विचार किया जा सकता है वहीं कई राज्य सरकारें वैट कम करने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर सकती हैं ताकि जनता को थोड़ी राहत मिल सके हालांकि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो सरकारों के लिए कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं होगा।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम रहेंगे। यदि ईरान संकट और वैश्विक युद्ध जैसे हालात और गहराते हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका असर सीधे आम आदमी की जेब वा बाजार की खरीदारी और देश की आर्थिक रफ्तार पर पड़ सकती है।