लगातार चौथी बार बड़े पेट्रोल और डीज़ल के दाम
पेट्रोल ₹2.61 और डीज़ल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा
नई दिल्ली, लगातार चौथी बार पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ना अब केवल भारत की समस्या नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर मंडरा रहे बड़े आर्थिक संकट का संकेत माना जा रहा है फरवरी 2026 से शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष अब लंबा खिंच चुका है और इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत औऱ मध्यस्थ देशों की बैठकों और युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद अब तक कोई निर्णायक समाधान नहीं निकल पाया है भारत में सोमवार को फिर पेट्रोल ₹2.61 और डीज़ल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हुआ पिछले दो हफ्तों में यह चौथी बढ़ोतरी है और कुल तक वृद्धि लगभग ₹7 से ₹8 प्रति लीटर तक पहुँच चुकी है इस संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बना हुआ है। दुनिया के करीब 20% तेल कारोबार का रास्ता इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है युद्ध और सैन्य तनाव के कारण यहाँ तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं हैँ अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है कि वह परमाणु कार्यक्रम और समुद्री गतिविधियों पर समझौता करे जबकि ईरान भी अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य मौजूदगी हटाने की शर्त रख रहा है अमेरिकी नेताओं की ओर से कई बार गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई लेकिन अब तक वार्ता किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुँची इस टकराव का असर अब केवल तेल तक सीमित नहीं रहा पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने लगी है ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थ, गैस सिलेंडर, हवाई यात्रा, उर्वरक और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा गहराने लगा है अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था रेसिशन यानी मंदी की ओर जा सकती है भारत जैसे देशों पर असर ज्यादा इसलिए पड़ रहा है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है सप्लाई प्रभावित होने से सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा यही कारण है कि लगातार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है अब इसके दुष्परिणाम जमीन पर भी दिखने लगे हैं ट्रकों और बसों का किराया बढ़ा औऱ सब्ज़ियों और राशन के दाम ऊपर जा रहे हैं एयरलाइंस टिकट महंगे हो रहे हैं
उद्योगों की लागत बढ़ रही है शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है कई देशों में ईंधन संकट और प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं ।
हालांकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे तो तेल सप्लाई, शिपिंग और स्टोरेज सिस्टम को सामान्य होने में महीनों लग सकते हैं।
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