पसमांदा उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट अनवर अहमद मंसूरी ने राष्ट्रीय पसमांदा के मंच से मुस्लिम समाज को दिया संदेश
जहां रहेंगे वफादारी से रहेंगे, जिसके साथ रहेंगे वफादारी के साथ रहेंगे , जहां काम करेंगे वफादारी से काम करेंगे
CURATED BY – SHARUKH MIRZA | CITYCHIEFNEWS
नीमच, पसमांदा समाज को लेकर नीमच जिले के बंधनगार्डन में प्रदेश स्तरीय का एक अधिवेशन का आगाज किया गया जिसमें मुस्लिम पसमांदा बिरादरियों के राष्ट्रीय स्तरीय प्रदेश स्तरीय जिलास्तरीय के पदाधिकारी गढ़ सम्मीलत व शामिल हुए जिसमें पसमांदा मुस्लिम उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट अनवर अहमद मंसूरी मुख्य वक्ता के रूप में मंच पर सम्मिलित हुए व पूर्व नगर पालिका नीमच अध्यक्ष राकेश जैन पप्पू विशेष अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए पसमांदा" एक फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ है "पसमांदा छूटे हुए लोग" जो पस और मांदा से मिलकर बना है. पस का अर्थ पीछे होता है और मांद का अर्थ छूट जाना होता है.ऐसे में पीछे छूट गए लोगों को पसमांदा कहा जाता है. मुस्लिमों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े तबके को पसमांदा कहा जाता है.
पसमांदा मुस्लिम, जो कि मध्यप्रदेश की मुस्लिम आबादी का लगभग 80% हिस्सा है,वर्तमान की केंद्र सरकार ने मुस्लिम समुदाय को सशक्त किया है. सरकार ने पसमांदा मुस्लिमों को सरकारी योजनाओं से सीधा फायदा पहुंचाया है. बिना किसी भेदभाव के मोदी सरकार की नीतियों का लाभ पसमांदा मुस्लिम समाज तक सीधे पहुंच रहा है. आजाद भारत में अभी तक किसी भी प्रधानमंत्री ने पसमांदा मुसलमानों की सुध नहीं ली. नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पसमांदा मुसलमानों के दर्द को समझा और उनके राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को महसूस किया.राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए पसमांदा मुसलमानों को सभी राजनीतिक दलों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल तो किया, लेकिन पसमांदा मुसलमानों को उनके हाल पर छोड़ दिया. जब भी कुछ देने की बात आई तो मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित ठेकेदारों को रेवड़ी खिला कर इन पसमांदा मुसलमानों को इनके मूल मुद्दों से भटकाने का काम किया. भाजपा ही सच्चे अर्थों में पसमांदा मुसलमानों की हितैषी साबित हुई है. भाजपा ने अपनी योजनाओं के माध्यम से पसमांदा मुस्लिम समाज का आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास बिना किसी भेद भाव और बिना तुष्टीकरण किए किया है.
सरकार की आवास योजना, आयुष्मान योजना, किसान सम्मान , लाडली बहना ,निधि योजना जैसी अनेकों योजनाओं से देश के दलित, शोषित, पीड़ित, गरीब मजदूर किसानों के साथ- साथ भारतीय मूल का पसमांदा मुसलमान को भी योजना से लाभान्वित कराया गया है. आजादी के बाद 75 साल मे पसमांदा मुसलमान हाशिये पर आ चुका था. सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ इस समाज तक पहुंचना शुरू हुआ है तब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पसमांदा समाज का भरोसा और गहरा हुआ है. आजादी के बाद से पिछले 70 साल में देश व प्रदेशों में कांग्रेस, सपा, बसपा समेत अन्य तथाकथित सेक्युलर विपक्षी दलों ने पसमांदा मुस्लिमों को गुमराह किया है. और उनका इस्तेमाल सिर्फ बैंक वोट के रूप में किया है इन दलों ने अपने फायदे के लिए मुस्लिम समाज को का भरपूर इस्तेमाल किया है. सिर्फ वोट बटोरने के लिए मुस्लिम समाज को गुमराह किया जाता है. इस पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा हैदराबाद अधिवेशन में पसमांदा मुसलमानों के हितों के लिए और उनके अधिकारों की बात कही तभी से पसमांदा मुस्लिम को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों में वोट बैंक खसकने को लेकर उत्तल-पुथल मची हुई है। तथा आज पसमांदा अधिवेशन नीमच में रखा गया है इसके माध्यम से पसमांदा की आवाज देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुखिया तक पहुंचाई गई पसमांदा मुस्लिम समाज के शिक्षित अल्पसंख्यक आयोग वक्फ कमेटी, हज कमेटी ,मदरसा बोर्ड एवं अल्पसंख्यकों के संबंधित योजनाओं के संबंधित विभागों का दायित्व एवं सदस्य बनाए व योजनाओं में भागीदार बनाएं जिससे अल्पसंख्यक को योजनाओं का लाभ मिल सके जिससे वह प्रधानमंत्री के सपनों को सपनों को साकार कर सके। सही समय है कि अपने खोए हुए राजनैतिक सम्मान को वापस लाने, पिछड़ेपन को दूर करने , शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगे बढ़ा जाए.