राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी अब बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा नहीं है. पार्टी प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने सोमवार (14 अप्रैल) को इसकी घोषणा की. घोषणा करते हुए पारस ने कहा कि उनकी पार्टी को अन्याय का सामना करना पड़ा क्योंकि यह दलित पार्टी है और एनडीए की बैठकों में बिहार में भाजपा और जेडीयू के राज्य प्रमुखों ने उनकी पार्टी का कोई जिक्र नहीं किया.

पारस ने कहा, ‘मैं 2014 से एनडीए के साथ हूं. आज मैं घोषणा करता हूं कि अब से मेरी पार्टी का एनडीए से कोई संबंध नहीं रहेगा.’ अपनी पार्टी के राजनीतिक भविष्य के बारे में बात करते हुए पशुपति पारस ने कहा, ‘अगर महागठबंधन हमें सही समय पर उचित सम्मान देता है, तो हम भविष्य में राजनीति के बारे में जरूर सोचेंगे.’ पारस ने इस साल आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ कई बैठकें की हैं.

नीतीश कुमार पर आरोप
पारस ने सोमवार को बीआर अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में एनडीए से अपनी पार्टी के अलग होने की घोषणा की. आरएलजेपी के समारोह में पारस ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाया और कहा, ‘नीतीश कुमार के 20 साल के शासन में, राज्य में शिक्षा प्रणाली बर्बाद हो गई है, कोई नया उद्योग स्थापित नहीं हुआ है, और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सभी कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रभावित करता है.’

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि ‘एनडीए पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा’. आरएलजेपी का गठन 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी में विभाजन के बाद हुआ था, जिसकी स्थापना उनके दिवंगत भाई रामविलास पासवान ने की थी. पारस ने पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले अपना कैबिनेट पद छोड़ दिया था, जब उनके भतीजे की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एनडीए के घटक के रूप में चुनाव लड़ने के लिए पांच सीटें मिली थीं.