पंडित विशंभर सिंह की पुण्यतिथि पर मोक्षायतन योग संस्थान और नेशन बिल्डर्स एकेडमी ने वैदिक यज्ञ, पुष्पांजलि उनके जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को याद करके उनकी पुण्यतिथि मनाई
एक स्कूल मास्टर जिसके लिए राष्ट्रपति भी चलकर आए
CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWS
सहारनपुर, अमर स्वातंत्र्य योद्धा और आदर्श शिक्षक पंडित विशंभर सिंह की पुण्यतिथि पर आज मोक्षायतन योग संस्थान और नेशन बिल्डर्स एकेडमी ने वैदिक यज्ञ, पुष्पांजलि उनके जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों को याद करके उनकी पुण्यतिथि मनाई। वह ऐसे शिक्षक थे जिनकी स्मृति में बने भव्य विश्वंभर सिंह द्वार और मार्ग का लोकार्पण करने के लिए दो वर्ष पूर्व देश के १४ वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद के साथ स्वयं सहारनपुर आए थे। बिहार स्थित विशाल जलगोविंद मठ की महंताई ठुकराकर बेसिक स्कूल में अध्यापक रहते हुए आजादी की लड़ाई में सक्रिय होने वाले इस अनोखे सेनानी का मानना था कि किसी भी मूल्य पर देश को ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिलाना ही हम लोगों का मकसद है गिरफ्तारी, गोली, फांसी और यातनाओं से बेखौफ होकर! उनका उद्देश्य जेल जाना नहीं मुल्क को आजाद कराने के लिए जीना और जरूरत पड़ने पर मरना भी था। वह कहते थे कि यदि केवल जेल जाना या फांसी खाना ही लक्ष्य होता तो लड़ाई चल ही नहीं सकती थी। वह कहते थे कि राष्ट्र पथ चलते हुए जो भी मिले यह भी सही वह भी सही। पंडित जी स्वातंत्र्य योद्धा और समाज सुधारक होने के साथ-साथ नगर के पहले शिक्षक थे जिनके निमंत्रण पर बेटे ओंकार सिंह शर्मा के मूक बधिर विद्यालय का उद्घाटन करने प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद सहारनपुर आए और जिन्हें सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन ने स्वयं अपने हाथों से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा था। देश आजाद होने के बाद उनकी आजादी पाने की लड़ाई आजादी की रक्षा की लड़ाई में बदल गई थी। शिक्षा, धर्म और देशप्रेम की त्रिवेणी पंडित विश्वंभर सिंह पर सभी को ऐसा यकीन था कि हाई कोर्ट तक मुकदमे लड़ने के बाद भी जटिल मुकदमों में लोग उनकी चौखट से न्याय पाते थे। आज स्मृति दिवस को संबोधित करते हुए पंडित जी के पुत्र और अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि हमने उनके जीवन से सीखा कि शिक्षक का कार्य बच्चों को मात्र अक्षर ज्ञान देना नहीं बल्कि अक्षरज्ञान (कभी न मिटने वाला सच्चा ज्ञान) और जीने का सलीका देकर सफल इंसान बनाना है, पंडित जी स्वयं में चलते फिरते विश्वविद्यालय थे। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने एक बार उन्हें पंडित विशंभर सिंह जी के साथ अपने बचपन के नाते की चर्चा करते हुए बताया था कि पंडित जी का लड़ाई लड़ने का ढंग निराला था, वह सक्रिय क्रांतिकारियों को संरक्षण देने और उनकी मदद करने में नहीं चूकते थे। एक रोचक संस्मरण सुनाते हुए चरण सिंह जी ने बताया की आजादी की लड़ाई के दौरान पंडित जी ने एक बार तो मुझे पुलिस से बचकर अपने घर में बुगचे में लुको (छिपा) लिया था और गारद को बैरंग ही वापस जाना पड़ा था। आजादी मिलने के बाद पंडित जी की पहल पर ही उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने डा संपूर्णानंद ने उत्तर प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक हिंदी के साथ अनिवार्य संस्कृत पढ़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। पंडित जी का जीवन शिक्षकों, छात्रों और समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। स्मृति दिवस कार्यक्रम में नंदकिशोर शर्मा, मिथलेश शर्मा, योगाचार्य अनीता शर्मा, सुरभि सेठी, मुकेश शर्मा, अजय सिंह, अमरनाथ, मोहित ढल्ला, राजीव आनंद, दीपक मौर्य आदि ने भी विचार व्यक्त किए।