उत्तर कोरिया ने नाटो (NATO) की नई सैन्य ईंधन आपूर्ति योजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने आरोप लगाया है कि यह योजना नाटो की युद्ध संबंधी तैयारियों को दर्शाती है और संगठन पहले की तुलना में अधिक आक्रामक सैन्य गठबंधन बनता जा रहा है। उत्तर कोरिया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वह खुद भी लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने और लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण में जुटा हुआ है।

दरअसल, नाटो ने हाल ही में ‘फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान’ को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध के दौरान विकसित सैन्य ईंधन पाइपलाइन और भंडारण नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और उसकी क्षमता बढ़ाना है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) ने इस फैसले को युद्ध की तैयारी की दिशा में बड़ा कदम करार दिया है।

नाटो की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है उत्तर कोरिया

दक्षिण कोरिया की योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि वह नाटो की सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए सैनिक भेजने के बाद प्योंगयांग की दिलचस्पी नाटो की रणनीतियों में और बढ़ गई है। वहीं, नाटो लगातार यूक्रेन को सैन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है।

केसीएनए ने अपनी टिप्पणी में कहा कि शुरुआत में इस योजना की लागत को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे, लेकिन अंततः सभी सहमत हो गए। एजेंसी के मुताबिक, इससे यह स्पष्ट होता है कि नाटो भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए रणनीतिक ईंधन भंडारण को अत्यधिक महत्व दे रहा है।

रूस के खिलाफ युद्ध की तैयारी का लगाया आरोप

उत्तर कोरिया ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी नाटो की इस योजना को रूस के साथ संभावित संघर्ष की तैयारी के रूप में देख रहा है। केसीएनए के अनुसार, इस पहल का वास्तविक उद्देश्य भविष्य में होने वाले युद्धों के लिए ईंधन और अन्य सैन्य संसाधनों का बड़े पैमाने पर भंडारण करना है।

सरकारी एजेंसी ने आरोप लगाया कि नाटो पर्याप्त ईंधन और युद्ध सामग्री इकट्ठा कर दुनिया के किसी भी हिस्से में सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि संगठन की स्थापना के बाद पहली बार उसकी युद्ध संबंधी तैयारियां इतनी स्पष्ट रूप से सामने आई हैं।

एशिया-प्रशांत में बढ़ती सैन्य मौजूदगी पर भी जताई आपत्ति

उत्तर कोरिया ने नाटो पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने का भी आरोप लगाया। उसके मुताबिक, गठबंधन उन देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार सैन्य अभ्यास और शक्ति प्रदर्शन कर रहा है, जिन्हें वह उत्तर कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण मानता है।

केसीएनए ने हाल ही में हवाई द्वीपसमूह और उसके आसपास आयोजित द्विवार्षिक ‘रिम ऑफ द पैसिफिक’ (RIMPAC) सैन्य अभ्यास का भी उल्लेख किया, जिसमें जर्मनी और इटली सहित कई नाटो सदस्य देशों ने हिस्सा लिया था। उत्तर कोरिया ने इसे इस बात का संकेत बताया कि नाटो अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र को भी संभावित सैन्य मोर्चे के रूप में देख रहा है।

'युद्ध को बढ़ावा देना नाटो के पतन का कारण बनेगा'

अपने बयान के अंत में केसीएनए ने कहा कि नाटो का वास्तविक स्वरूप अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है और वह युद्धोन्मुखी सैन्य गठबंधन के रूप में सामने आ रहा है। उत्तर कोरिया ने दावा किया कि युद्ध की दिशा में उठाए जा रहे ऐसे कदम अंततः नाटो के लिए ही नुकसानदायक साबित होंगे और उसके पतन की प्रक्रिया को तेज करेंगे।