E20 विवाद पर नितिन गडकरी की सफाई
एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से मेरा कोई लेना-देना नहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय करता है संचालन
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति (E20) को लेकर चल रहे विवाद के बीच स्पष्ट किया है कि इस नीति के निर्माण, क्रियान्वयन और मूल्य निर्धारण में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पूरी तरह पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन संचालित होता है, जबकि उनके मंत्रालय का कार्य सड़क परिवहन और वाहन संबंधी नीतियों तक सीमित है। गडकरी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
डीपफेक वीडियो और भ्रामक प्रचार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे गडकरी
E20 नीति को लेकर उनके और उनके परिवार पर लगाए जा रहे हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोपों के बीच नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 86 पन्नों की याचिका दायर की है। याचिका में AI से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक एवं मानहानिकारक सामग्री पर रोक लगाने की मांग की गई है। इन पोस्ट और वीडियो में दावा किया जा रहा था कि गडकरी और उनका परिवार E20 नीति से आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली है और अंतरिम राहत, जिसमें विवादित सामग्री हटाने की मांग भी शामिल है, पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
E20 नीति पर सरकार का पक्ष
E20 वह ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार ने इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से लागू किया है। यह कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था और वर्ष 2026 तक देशभर में लागू किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इस पहल से विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, किसानों को अतिरिक्त बाजार मिला है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिली है।
इंजन और माइलेज को लेकर क्या बोले गडकरी?
E20 ईंधन को लेकर कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी और इंजन पर असर पड़ने जैसी शिकायतें उठाई हैं। इस पर गडकरी ने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि E20 के कारण किसी वाहन का इंजन खराब हुआ हो। उन्होंने कहा कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कुछ कम होने के कारण माइलेज में मामूली अंतर आ सकता है, लेकिन शहरों में इसका प्रभाव बहुत कम महसूस होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के पास E20 से इंजन खराब होने का प्रमाणित उदाहरण है तो वह सामने लाए।
परिवार के कारोबार पर लगे आरोपों का दिया जवाब
अपने परिवार के व्यवसाय को लेकर उठे सवालों पर गडकरी ने कहा कि उनका परिवार चीनी मिल का संचालन करता है, लेकिन एथेनॉल उत्पादन उस कारोबार का बेहद छोटा हिस्सा है, जो कुल कारोबार का आधा प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने दोहराया कि एथेनॉल की कीमतें कैबिनेट तय करती है और इस प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं होती। उनके अनुसार, एथेनॉल को बढ़ावा देने की नीति नई नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी और बाद में यूपीए सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया।
ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित से जुड़ी है नीति
सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम करना है। एथेनॉल गन्ना, मक्का, धान की पराली जैसे कृषि उत्पादों से तैयार होता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं। गडकरी ने ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग हो रहा है और इससे वाहनों को कोई व्यापक नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में बनने वाले नए वाहन E20 के अनुकूल तैयार किए जा रहे हैं, हालांकि पुराने मॉडलों में तकनीकी सीमाएं हो सकती हैं।
नीति पर बहस जारी, सरकार और उपभोक्ताओं के अलग-अलग तर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ पुराने वाहनों की अनुकूलता, माइलेज और उपभोक्ता विकल्प जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। सरकार E20 को सुरक्षित और लाभकारी बता रही है, जबकि कुछ वाहन मालिक और उपभोक्ता संगठन शुद्ध पेट्रोल या E10 विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा तकनीकी, आर्थिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी
नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल LLC, X Corp (पूर्व में ट्विटर) सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति भी प्राप्त कर ली है। 28 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने उन्हें मुकदमा दायर करने की मंजूरी दी। गडकरी ने अदालत से फर्जी, भ्रामक और मानहानिकारक वीडियो व पोस्ट पर स्थायी रोक लगाने, उन्हें हटाने तथा भविष्य में ऐसे कंटेंट के प्रसार को रोकने के निर्देश देने की मांग की है।
देश
दुनिया
मनोरंजन
खेल
छत्तीसगढ
हरियाणा
दिल्ली
धार्मिक
व्यापार
टेक & ऑटो
शिक्षा
स्वास्थ्य
आंध्र प्रदेश
तेलंगाना
सिक्किम
ओड़िशा
झारखंड
असम
नागालैण्ड