मैहर, नगर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था महर्षि विद्या मंदिर में भारतीय संस्कृति एवं गुरु-शिष्य परंपरा के प्रतीक गुरु पूर्णिमा पर्व को श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए अपने गुरुओं के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ शिक्षक के.के. शुक्ला तथा अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य मनोज सिंह परिहार ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की परंपरा के अनुरूप गुरु पूजन एवं भावातीत ध्यान (Transcendental Meditation) के सामूहिक अभ्यास से हुआ। उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने गुरु के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए भारतीय संस्कृति की महान गुरु-शिष्य परंपरा का स्मरण किया।

इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा गुरु महिमा पर आधारित एकल एवं सामूहिक गीत, आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य तथा भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं, जिनकी सभी ने सराहना की। वहीं विद्यालय के शिक्षकों ने भी गुरु भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना दिया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य मनोज सिंह परिहार ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु वह प्रकाश स्तंभ है जो अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का दायित्व है कि वह अपने गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर सत्य, अनुशासन, नैतिकता एवं सत्कर्म को अपने जीवन का आधार बनाए। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने तथा अपने श्रेष्ठ कार्यों से समाज कल्याण में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि के.के. शुक्ला ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुरु के सम्मान एवं भारतीय संस्कृति में गुरु की सर्वोच्च भूमिका पर प्रकाश डाला तथा गुरु-शिष्य परंपरा को जीवन की सबसे बड़ी धरोहर बताया।

कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका माया सिंह एवं शिक्षक दीप सावले ने प्रभावशाली ढंग से किया। अंत में सभी उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अतिथियों को प्रसाद वितरित किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ।

विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि गुरुजनों के आदर्शों का अनुसरण करते हुए शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन ने विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा और नैतिक मूल्यों के प्रति नई ऊर्जा एवं प्रेरणा का संचार किया।