मुजफ्फरपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर में गुरुवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड ने देशभर को झकझोर दिया है। यह हादसा शहर के ब्रह्मपुरा इलाके स्थित निजी अस्पताल प्रसाद हॉस्पिटल में हुआ जहां ICU में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई आग इतनी तेजी से फैली कि मरीज उनके परिजन और अस्पताल कर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 20 से अधिक मरीज झुलस गए या घायल हुए हैं कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
घटना सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच हुई जब ICU में 13 से 15 मरीज भर्ती थे अचानक धुआं भरने लगा और कुछ ही मिनटों में पूरा ICU आग और जहरीले धुएं की चपेट में आ गया मरीजों को बाहर निकालने के लिए परिजनों स्थानीय लोगों और बचाव दल को खिड़कियां और दरवाजे तोड़ने पड़े कई मरीजों को स्ट्रेचर और चादरों के सहारे बाहर निकाला गया आग लगने के कारणों को लेकर शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है जब की कुछ अधिकारियों का कहना है कि ICU में मौजूद विद्युत उपकरणों या ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम के आसपास तकनीकी खराबी से चिंगारी निकली हो सकती है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक कारण फॉरेंसिक और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हादसे के बाद मौके पर दमकल की कई गाड़ियां पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा राहत और बचाव कार्य की निगरानी की मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं और कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई बिहार सरकार ने भी घटना पर गंभीरता दिखाई है राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है तथा घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही दिल्ली में एक भीषण अग्निकांड ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि अस्पतालों, होटलों और अन्य सार्वजनिक भवनों में फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर गंभीर खामियां मौजूद हैं। मुजफ्फरपुर की इस त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संवेदनशील संस्थानों में सुरक्षा मानकों की केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है या वास्तव में उनका पालन भी किया जा रहा है।