CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWS

सहारनपुर, दुनिया में भारत की योग विद्या और भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले देश के  अग्रणी संस्थान और भारत योग के प्रणेता मोक्षायतन योग संस्थान इस वर्ष अपना स्थापना दिवस समारोह नहीं मनाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उनकी पत्नी और भारत की प्रथम महिला सविता कोविंद, मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराजसिन रूपुन, सूरीनाम के राष्ट्रपति बोलेनो डेजी बाउटरसे, संघ प्रमुख  मोहनराव भागवत, गवर्नर आनंदीबेन पटेल, राम नाईक, विष्णुकांत शास्त्री, विदेशी हस्तियों में  प्रधानमंत्री मोदी के करीबी जापानी राजनयिक केनिचिरो ताऊ फोकू, मीनाको कुनो, ताइवान की जिनी चेन,  संघ सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रीगण और उनसे भी पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह लोकसभाध्यक्ष बलराम जाखड़, अनेक राज्यपालों, देश के नामचीन पत्रकारों और देश की बड़ी हस्तियों का आकर्षण बना रहा। मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान का ५३ वां स्थापना दिवस का समारोह इस बार मानवता को दहला देने वाले पहलगाम में हुए निहत्थे निर्दोष हिंदुओं के नृशंस हत्याकांड में मृतकों के शोक और राष्ट्रीय आक्रोश के कारण स्थगित कर दिया गया है। यह जानकारी देते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु स्वामी भारत भूषण, निदेशक अंतर्राष्ट्रीय विस्तार सीए धीरज सारस्वत और संस्थान के अधिष्ठाता एन के शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में देश-विदेश से आने की सहमति दे चुकी हस्तियों को भी इस स्थगन की सूचना दे दी गई है। 
पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि योगेश्वर श्री कृष्ण और चाणक्य सरीखों ने भी सही समय पर मानवता के हित में आक्रोश दिखाया है इसकी जरूरत ना होती तो शब्दकोश में यह शब्द ही ना होता। उन्होंने योग से युद्ध का भी गहरा रिश्ता बताया और कहा कि हर योगी को छह दुश्मनों से लड़ना ही होता है, स्वयं को जीतने के लिए भी ! काम, क्रोध, मद, लोभ मोह और मत्सर रूपी छह दुश्मन जब समाज में सक्रिय होते हैं तभी ऐसे घिनौने अपराध और आतंक पनपते हैं। योग गुरु भारत भूषण ने सुरक्षा स्वाभिमान और धर्म के लिए युद्ध करने को धर्म व योग सम्मत बताते हुए कहा कि योगेश्वर कृष्ण ने रौरव युद्ध करने की प्रेरणा दी थी। गुरु बोले कि यदि पहलगाम में मौत निश्चित देखकर लोग सिर्फ स्वयं के बजाय सबको बचाने की सोचकर एक बार इन पांच आतंकियों पर टूट पड़ते तो २७ मौतें न होती और मरते भी तो योद्धा की मौत तो मरते। उन्होंने आतंक की कमर तोड़ने के लिए प्रतिरोध और प्रतिकार दोनों को जरूरी बताया। मौके पर प्रतिरोध होता तो आतंकी तौबा बोल जाते लेकिन मानवता पर हमले का अब प्रतिकार होगा और जड़ों पर चोट भी। गुरु ने अन्याय सहने को अन्याय करने से भी ज्यादा बड़ा और घातक अपराध बताया। अधिष्ठाता एन के शर्मा ने कहा कि हमारे जन्मदिवस की तरह ही संस्था का स्थापना दिवस महत्वपूर्ण घटना है इसलिए इस बार ३० अप्रैल को स्थानीय आधार पर ही सादगीपूर्वक कार्यक्रम किया जाएगा। उन्होंने "नाता योग और युद्ध का" को ५३ वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का थीम बताया। इस आतंकी हमले में मारे गए २७ लोगों को गीता के श्लोकों से मौनी श्रद्धांजलि के साथ बैठक समाप्ति पर लोगों की आँखें नम हो उठी।