CURATED BY – RAJEEV KHARE | CITYCHIEFNEWS

रायपुर, महादेव सट्टा एप घोटाले की जांच के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार सुबह छत्तीसगढ़, दिल्ली, भोपाल और कोलकाता में 60 ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उनके दो पूर्व OSD आशीष वर्मा और मनीष बंछोर, उनकी पूर्व सचिव सौम्या चौरसिया, विधायक देवेंद्र यादव, रिटायर्ड IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, और 4 वरिष्ठ IPS अधिकारी—आनंद छाबड़ा, अभिषेक पल्लव, आरिफ शेख और प्रशांत अग्रवाल के घरों की तलाशी ली जा रही है।

महादेव सट्टा एप से जुड़े घोटाले पर शिकंजा

CBI की इस कार्रवाई को महादेव ऑनलाइन सट्टा एप घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को इस मामले में बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला ट्रांजेक्शन और राजनीतिक संरक्षण की अहम जानकारी मिली है। संदेह है कि इस घोटाले में कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर के लोग शामिल हो सकते हैं, जिनके खिलाफ अब ठोस सबूत जुटाए जा रहे हैं।

CBI अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी अवैध सट्टेबाजी से अर्जित काले धन को सफेद करने और इसमें शामिल प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच के लिए की जा रही है। इस मामले में पहले से ही कई लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और अब शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

CBI रेड पर सियासत तेज, कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग

CBI की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम” बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“यह छापा सिर्फ मुझे और मेरे करीबियों को बदनाम करने के लिए डाला गया है। जब भी चुनाव आते हैं, केंद्र सरकार ईडी-सीबीआई को हमारे पीछे लगा देती है। अगर मैंने कुछ गलत किया होता, तो मुझ पर कार्रवाई पहले ही हो गई होती। लेकिन यह सिर्फ विपक्ष को दबाने की कोशिश है।”

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “भाजपा सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। जब से हमने मजबूत विपक्ष की भूमिका निभानी शुरू की, हमें टारगेट किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता सब देख रही है और आने वाले समय में जवाब देगी।”

वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा,
“अगर कोई बेगुनाह है तो उसे डरने की जरूरत नहीं। जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है, वे अब कानून की पकड़ में आएंगे।”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा है कि “छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार अपने चरम पर था। शराब घोटाला, महादेव सट्टा एप, अवैध कोयला व्यापार—हर जगह घोटाले ही घोटाले हुए। अब जब जांच हो रही है, तो कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बताने में लगी है। सच्चाई जल्द ही सामने आएगी।”

कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी भी वजह?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस छापेमारी का संबंध छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए मची होड़ से भी हो सकता है। पार्टी में कई नेता संगठन में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में हैं, और इस कार्रवाई को आंतरिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल इस पर खुलकर कोई नेता टिप्पणी करने से बच रहा है।

CBI की जांच जारी, बड़े खुलासे संभव

CBI की टीम फिलहाल जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, और कुछ और बड़े नाम भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।

यह छापेमारी छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लाने वाली साबित हो सकती है, क्योंकि इसका असर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
( राजीव खरे चीफ ब्यूरो छत्तीसगढ़)