नई दिल्ली, विजय के तमिलनाडु की राजनीति में उभरने और मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती केवल सरकार चलाना नहीं, बल्कि एक ऐसे राज्य को संभालना होगा जहाँ दशकों से द्रविड़ राजनीति का मजबूत ढांचा रहा है। उनकी पार्टी को सहयोग देने वाले दल भी भविष्य में सरकार पर प्रभाव डालने की कोशिश कर सकते हैं।विजय सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियाँ DMK और AIADMK का मजबूत राजनीतिक ढांचा तमिलनाडु में M. K. Stalin की DMK और AIADMK का वर्षों पुराना संगठन है। विजय को अपनी पार्टी को जमीनी स्तर तक मजबूत करना होगा। फिल्मी लोकप्रियता को प्रशासन में बदलना जनता के बीच स्टारडम अलग बात है।लेकिन प्रशासन नौकरशाही और नीति लागू करना अलग चुनौती होगी। लोगों की अपेक्षाएँ बहुत ज्यादा रहेंगी गठबंधन सहयोगियों का दबाव यदि सरकार गठबंधन के सहारे बनी है तो सहयोगी दल मंत्री पद,एवं बजट आवंटन,क्षेत्रीय फैसलों,और नीतियों पर दबाव बना सकते हैं।तमिलनाडु की राजनीति में छोटे दल अक्सर समर्थन के बदले राजनीतिक हिस्सेदारी मांगते रहे हैं। विजय को संतुलन बनाकर चलना होगा ताकि सरकार स्थिर रहे केंद्र बनाम राज्य संबंध अगर राज्य सरकार और केंद्र की विचारधारा अलग हुई तो GST फंड,भाषा नीति,NEET परीक्षा, और राज्य अधिकारों पर टकराव संभव है युवा बेरोजगारी और उद्योग I T और मैन्युफैक्चरिंग हब होने के बावजूद रोजगार और ग्रामीण विकास बड़ा मुद्दा रहेगा। विजय सरकार किन बदलावों की तैयारी कर सकती है Tamilaga Vettri Kazhagam( T V K ) की राजनीति अब तक “भ्रष्टाचार विरोध”, “युवा नेतृत्व” और “पारदर्शी शासन” के इर्द-गिर्द दिखाई गई है संभावित बदलाव
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई सरकारी सेवाओ युवाओं के लिए रोजगार मिशन शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर महिलाओं के लिए विशेष योजनाएँ फिल्म और IT उद्योग को बढ़ावा ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार NEET के खिलाफ राज्य स्तर पर वैकल्पिक नीति की कोशिश विजय के मेनिफेस्टो की संभावित बड़ी गारंटियाँ शामिल हैँ हालाँकि वास्तविक घोषणापत्र समय और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा लेकिन उनकी पार्टी अब तक जिन मुद्दों पर जोर देती रही है उनमें शामिल हो सकते हैं युवाओं के लिए रोजगार,गारंटी महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता, मुफ्त या सस्ती शिक्षा-स्वास्थ्य योजनाएँ,किसानों के लिए ऋण राहत,भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन,सरकारी भर्ती में पारदर्शिता छोटे व्यापारियों को टैक्स और लाइसेंस राहत, ये वादे कब तक पूरे हो सकते हैं आमतौर पर किसी नई सरकार के वादे 3 चरणों में लागू होते हैं पहले 100 दिन कुछ लोकलुभावन घोषणाएँ कैबिनेट गठन भ्रष्टाचार जांच या प्रशासनिक बदलाव मुफ्त योजनाओं की शुरुआत पहले 1 या 2 साल मे रोजगार योजनाएँ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट,शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार
पूरे कार्यकाल यानि की लगभग 5 साल बड़े आर्थिक और औद्योगिक बदलाव सामाजिक योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारना सबसे अहम बात यह होगी कि विजय अपनी “एंटी-एस्टैब्लिशमेंट” छवि को प्रशासनिक क्षमता में कितना बदल पाते हैं। अगर गठबंधन सहयोगियों का दबाव बढ़ा या वादों के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिला, तो सरकार को कठिन राजनीतिक संतुलन बनाना पड़ सकता है।