झारखंड में नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार
एक करोड़ का इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा गिरफ्तार, 16 उग्रवादियों ने किया सरेंडर
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में गिने जाने वाले सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेता मिसिर बेसरा को संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर चल रहा था। कार्रवाई के दौरान उसके साथ चार अन्य माओवादी भी पकड़े गए। अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने धनबाद जिले में संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल उसके साथ पकड़े गए चार अन्य माओवादियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
मिसिर बेसरा लंबे समय से माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में सक्रिय था। उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और अन्य राज्यों में सुरक्षा बलों पर हमले, हथियारों की तस्करी, रंगदारी व नक्सली गतिविधियों से जुड़े 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्षों तक वह सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा और संगठन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से माओवादी संगठन के नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान सक्रिय कैडर, हथियारों की आपूर्ति, फंडिंग नेटवर्क, ठिकानों और भविष्य की रणनीतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जिससे झारखंड समेत आसपास के राज्यों में सक्रिय नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
इसी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली, जब 16 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें क्षेत्रीय, जोनल और सब-जोनल स्तर के कई सक्रिय नेता शामिल हैं, जिनमें पांच महिला कैडर भी हैं। आत्मसमर्पण करने वाले कई उग्रवादियों पर लाखों रुपये के इनाम घोषित थे।
सरेंडर के समय इन माओवादियों ने पुलिस को इंसास राइफल, एके-47 समेत कई आधुनिक हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी सौंपा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसके चलते कई उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
इस वर्ष झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज किया गया है। सुरक्षा बलों ने कई सफल अभियानों में बड़ी संख्या में माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अनेक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया है। अधिकारियों का मानना है कि शीर्ष माओवादी नेतृत्व पर लगातार हो रही कार्रवाई से संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है और आने वाले समय में राज्य में नक्सली गतिविधियों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
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